केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Budget 2026 को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए कहा कि इस बजट का मुख्य उद्देश्य निवेश बढ़ाना, टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना है। उन्होंने बताया कि सरकार ने ऐसे क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया है, जहां श्रम की अधिक जरूरत है और नौकरियों की संभावनाएं ज्यादा हैं।
वित्त मंत्री ने सोने की बढ़ती कीमतों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, जिससे सोने की मांग बढ़ी है। यह संकेत देता है कि फिलहाल बाजार में जोखिम को लेकर सतर्कता बनी हुई है।
बजट 2026 की प्रमुख प्राथमिकताएं
F&O ट्रेडिंग पर सख्ती:
फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर एसटीटी (STT) बढ़ाने के फैसले को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि इसका मकसद सट्टेबाजी को हतोत्साहित करना है। सरकार चाहती है कि लोग बिना समझे जोखिम भरे ट्रेडिंग में न उतरें।
विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन जारी रहेगा:
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (CPSEs) में निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण की प्रक्रिया जारी रहेगी।
निजी खपत मजबूत रहेगी:
वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले महीनों में लोगों की खर्च करने की क्षमता बेहतर बनी रहेगी, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
IBC में संशोधन की तैयारी:
सरकार बजट सत्र के दूसरे चरण में दिवाला और शोधन अक्षमता कानून (IBC) में सुधार से जुड़ा विधेयक पेश करेगी, ताकि वित्तीय प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके।
IDBI बैंक का रणनीतिक विनिवेश:
वित्त मंत्री ने कहा कि IDBI बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है और इससे सरकार के गैर-कर राजस्व को बल मिलेगा।
7–8% विकास दर बनाए रखना लक्ष्य
निर्मला सीतारमण ने कहा कि 7–8% की आर्थिक विकास दर बनाए रखना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है, क्योंकि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आम लोगों की आय में सुधार होगा। उनके मुताबिक, मजबूत अर्थव्यवस्था का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है।
महिलाओं की भागीदारी पर सरकार का नजरिया
वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास के साथ कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। खासकर सेमी-स्किल्ड नौकरियों में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ी है, क्योंकि नियोक्ता उनकी कार्यकुशलता को अधिक महत्व देने लगे हैं।
हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि बोर्डरूम और शीर्ष नेतृत्व में महिलाओं की संख्या अभी भी कम है। उन्होंने कहा कि अधिक महिलाओं को निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में आना चाहिए, ताकि वे नीतियों को प्रभावित कर सकें और अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनें।