भारत के रणनीतिक और बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। जोजिला टनल परियोजना में सफल ब्रेकथ्रू ब्लास्ट के बाद सुरंग के दोनों छोर पूरी तरह जुड़ गए हैं। इस उपलब्धि को इंजीनियरिंग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण पूरा हो गया है।
सालभर बना रहेगा कश्मीर और लद्दाख का संपर्क
वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग कई महीनों तक बंद रहता है। जोजिला टनल के संचालन में आने के बाद यह स्थिति बदल जाएगी। सुरंग के जरिए वर्षभर सुरक्षित और निर्बाध आवागमन संभव होगा, जिससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों और व्यापारियों को बड़ा लाभ मिलेगा।
कम समय में पूरी होगी लंबी यात्रा
इस आधुनिक सुरंग के चालू होने के बाद जोजिला दर्रे को पार करने में लगने वाला एक घंटे से अधिक का समय घटकर लगभग 15 मिनट रह जाएगा। जोजिला टनल न केवल यात्रा को तेज बनाएगी बल्कि कठिन मौसम में भी सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करेगी।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगी सुरंग
लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही यह सुरंग आधुनिक सुरक्षा और प्रबंधन प्रणालियों से सुसज्जित होगी। इसमें उन्नत वेंटिलेशन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, रेडियो संचार, स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम और निर्बाध बिजली आपूर्ति जैसी सुविधाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जोजिला टनल भारत की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक साबित होगी।
सीमा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
यह परियोजना सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम मानी जा रही है। सुरंग के शुरू होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना और आवश्यक संसाधनों की तेज पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। इसके अलावा पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। जोजिला टनल के कारण लद्दाख क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
2028 तक आम जनता के लिए खुल सकती है सुरंग
अधिकारियों के अनुसार ब्रेकथ्रू के बाद अब शेष सिविल और तकनीकी कार्यों को पूरा किया जाएगा। यदि कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ता रहा तो वर्ष 2028 की शुरुआत तक यह परियोजना आम लोगों के लिए खोल दी जा सकती है। इसके साथ ही देश को दुनिया की सबसे ऊंची और लंबी सिंगल-ट्यूब द्वि-दिशात्मक सुरंगों में से एक का लाभ मिलेगा।
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