सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के चर्चित पुणे पोर्श कार हादसा मामले में सोमवार को तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। यह दुर्घटना मई 2024 में पुणे के कल्याणी नगर इलाके में हुई थी, जिसमें दो आईटी पेशेवरों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने नाबालिगों की जिम्मेदारी को लेकर माता-पिता की भूमिका पर भी कड़ी टिप्पणी की है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि नशे की समस्या गंभीर है, लेकिन नाबालिग बच्चों को महंगी कार की चाबियां और खुला पैसा देना भी उतना ही गलत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिभावकों को अपने बच्चों पर बेहतर नियंत्रण रखना चाहिए।
जमानत पाने वाले आरोपी
अमर संतोष गायकवाड़ – आरोप है कि उन्होंने तीन लाख रुपये देकर डॉक्टर के सहायक के जरिए नाबालिग आरोपी का ब्लड सैंपल बदलवाया।
आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल – इनके खून के नमूने जांच में इस्तेमाल किए गए थे, हालांकि वे सीधे तौर पर कार में मौजूद नाबालिग से जुड़े बताए गए।
पहले क्या हुआ था?
दिसंबर 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमर गायकवाड़ समेत आठ आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा और अब तीन आरोपियों को जमानत दे दी गई। ब्लड सैंपल बदलने के मामले में कुल 10 लोग गिरफ्तार हुए थे, जिनमें नाबालिग के माता-पिता, डॉक्टर और अस्पताल कर्मचारी भी शामिल थे।
हादसा कैसे हुआ?
18–19 मई 2024 की रात करीब तीन करोड़ रुपये की पोर्श कार तेज रफ्तार में चलाते हुए एक 17 वर्षीय नाबालिग ने बाइक को टक्कर मार दी थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक कई मीटर तक घिसटती चली गई और उस पर सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के 14 घंटे बाद नाबालिग को शर्तों के साथ जमानत मिली थी, जिसमें उसे ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क सुरक्षा पर निबंध लिखने का आदेश दिया गया था। बाद में भारी जनविरोध के बाद जमानत रद्द कर दी गई और उसे ऑब्जर्वेशन होम भेजा गया। जून 2024 में हाई कोर्ट ने उसकी रिहाई का आदेश दिया।
यह मामला अब भी चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि यह न केवल सड़क सुरक्षा बल्कि नाबालिगों की जिम्मेदारी और अभिभावकों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।