SIR: भाजपा बोली – विपक्ष देशहित की हर पहल का करता है विरोध

चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण की घोषणा के बाद देशभर में राजनीतिक बवाल मच गया है। आयोग ने यह प्रक्रिया देश के 12 राज्यों में शुरू करने का एलान किया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने इस कदम पर आयोग की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े कर दिए।

डीएमके के प्रवक्ता सर्वानन अन्नादुरई ने कहा कि “असम में एसआईआर क्यों नहीं किया जा रहा? क्या यह नागरिकता जांचने की प्रक्रिया बन गई है?” उन्होंने 2003 को कटऑफ वर्ष तय करने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे किसे फायदा होगा, इस पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं। डीएमके का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहा है और मतदाता सूची में राजनीतिक हस्तक्षेप किया जा रहा है।

दूसरी ओर, टीएमसी ने कहा कि वह पारदर्शी मतदाता सूची के पक्ष में है, लेकिन अगर वैध मतदाताओं को परेशान किया गया, तो इसका विरोध किया जाएगा। पार्टी ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग किसी भी राजनीतिक दबाव में आकर अनुचित कदम नहीं उठाएगा।

इसी बीच, पश्चिम बंगाल भाजपा ने टीएमसी और डीएमके दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों को एसआईआर से डर इसलिए लग रहा है क्योंकि उनके वोटबैंक में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए शामिल हैं। भाजपा नेता केया घोष ने कहा कि बंगाल में कोई भी फर्जी या अवैध मतदाता नहीं होना चाहिए।
भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन INDI पर आरोप लगाया कि वे देशहित की हर पहल का विरोध करते हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने भी कहा कि “एसआईआर प्रक्रिया से किसी सही मतदाता को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि यह फर्जी और अवैध मतदाताओं को हटाने का एक ईमानदार प्रयास है।” उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि सभी राज्य सरकारें इस कार्य में सहयोग करेंगी।

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