RBI रेपो रेट में कटौती की उम्मीद अब और भी मजबूत हो गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि अगस्त में नीतिगत दरों में बदलाव संभव है।
यदि ऐसा होता है, तो देश के करोड़ों लोनधारकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
EMI कम हो सकती है और नए लोन लेना भी पहले से सस्ता हो जाएगा।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि “न्यूट्रल रुख का यह मतलब नहीं कि दरें नहीं घटेंगी।
जरूरत पड़ी तो मौद्रिक दरों में कटौती की जा सकती है।”
RBI रेपो रेट में कटौती के पीछे प्रमुख कारण महंगाई में भारी गिरावट है।
जून 2025 में खुदरा महंगाई दर 2.1% तक आ गई, जो 77 महीनों का सबसे निचला स्तर है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि FY26 में महंगाई दर 3.5% से भी नीचे जा सकती है।
इसी को देखते हुए अगस्त, अक्टूबर या दिसंबर में दरों में कटौती की संभावना प्रबल है।
देश में बिक्री के आंकड़े भी गिरावट की ओर इशारा कर रहे हैं।
जून में कार बिक्री 18 महीने के न्यूनतम स्तर पर रही।
घर और ज्वेलरी की बिक्री में भी गिरावट दर्ज की गई है।
इन संकेतों को देखते हुए RBI द्वारा ब्याज दरें घटाना अर्थव्यवस्था को गति देने का कदम हो सकता है।
RBI रेपो रेट में कटौती न सिर्फ EMI को सस्ता बनाएगी, बल्कि लोन की माँग को भी बढ़ावा देगी।
CITY ब्रोकरेज के अनुसार जुलाई में महंगाई दर घटकर 1.1% तक आ सकती है।
यह 1990 के बाद अब तक की सबसे कम रिटेल महंगाई दर होगी।
अगर अनुमान सटीक बैठते हैं, तो वित्त वर्ष 2025-26 में औसत महंगाई 3.2% रह सकती है।
यह स्थिति ब्याज दरों में कटौती का सही अवसर बनाती है।