छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिवंगत अहिवारा विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सम्मान में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अहिवारा स्थित शासकीय महाविद्यालय का नाम अब स्वर्गीय कोर्सेवाड़ा के नाम पर रखा जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य उनके सामाजिक योगदान और जनसेवा के कार्यों को आने वाली पीढ़ियों तक यादगार बनाए रखना है।
5 नवंबर 2026 को दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री ने दिवंगत विधायक के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान उन्होंने उनके जीवन, विचारों और समाज के प्रति समर्पण को याद किया।
डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के सम्मान में कॉलेज का नाम बदलने की घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दिवंगत विधायक का जीवन समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके सम्मान में अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह निर्णय केवल एक औपचारिक सम्मान नहीं है, बल्कि जनसेवा के प्रति उनके समर्पण और सामाजिक योगदान को स्थायी पहचान देने का प्रयास है।
इस घोषणा से क्षेत्र में उनके योगदान को नई पहचान मिलेगी और विद्यार्थी भी उनके जीवन से प्रेरणा ले सकेंगे।
समाज सेवा और वंचित वर्गों के उत्थान में रहा महत्वपूर्ण योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिवंगत विधायक एक सहज, सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में आम लोगों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए लगातार काम किया।
विशेष रूप से अनुसूचित जाति समाज के विकास, सामाजिक समानता और क्षेत्र की प्रगति के लिए उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे।
उनका मानना था कि समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
‘गुरुजी’ के नाम से लोगों के बीच थी विशेष पहचान
क्षेत्र के लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘गुरुजी’ कहकर बुलाते थे। यह संबोधन उनके प्रति जनता के विश्वास, सम्मान और आत्मीयता को दर्शाता था।
उनका व्यवहार सभी के प्रति सहज रहता था। यही वजह थी कि उन्होंने समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों के बीच अपनी विशेष जगह बनाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जनसेवा के प्रति समर्पण और सभी को साथ लेकर चलने का स्वभाव भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
मुख्यमंत्री साय ने साझा किया भावुक संस्मरण
श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री ने दिवंगत विधायक से जुड़ा एक व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया।
उन्होंने बताया कि जब कोर्सेवाड़ा उपचार के लिए हैदराबाद में भर्ती थे, तब उन्होंने स्वयं फोन करके उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। इसके साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को भी हैदराबाद जाकर उनका हालचाल जानने के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी को उनके स्वस्थ होकर लौटने की उम्मीद थी, लेकिन उनके निधन की खबर बेहद दुखद रही। उनके जाने से प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन को बड़ी क्षति पहुंची है।
जनप्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र के विकास को दी प्राथमिकता
अपने राजनीतिक जीवन के दौरान दिवंगत विधायक ने क्षेत्र की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया।
उन्होंने आम नागरिकों की जरूरतों को समझते हुए जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। सामाजिक सशक्तीकरण और जरूरतमंद लोगों की सहायता उनके सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलू रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सेवाभावना और समर्पण को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
श्रद्धांजलि सभा में कई जनप्रतिनिधियों ने किया नमन
भिलाई-3 में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के कई मंत्री, सांसद और विधायक शामिल हुए। सभी ने दिवंगत विधायक के व्यक्तित्व और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया।
श्रद्धांजलि देने वालों में प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव
- कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब
- रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल
- जगदलपुर विधायक किरण देव
- दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चन्द्राकर
इसके अलावा जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष कीर्ति नायक, दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
अहिवारा कॉलेज का नया नाम बनेगा जनसेवा की विरासत का प्रतीक
मुख्यमंत्री की इस घोषणा से अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय को दिवंगत जनप्रतिनिधि के नाम से पहचान मिलने का रास्ता साफ हुआ है। इससे उनके सामाजिक कार्यों और जनहित के प्रति समर्पण को संस्थागत सम्मान मिलेगा।
डोमन लाल कोर्सेवाड़ा का जीवन समाज सेवा, सादगी और जनकल्याण के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखने की मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा उनके योगदान को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को उनके सामाजिक कार्यों और विचारों से परिचित कराने में भी मददगार हो सकता है।
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