गढ़ विच्छेदन परंपरा: सारंगढ़ के दशहरे में फिसलन भरे किले

गढ़ विच्छेदन परंपरा में मिट्टी के किले पर चढ़ने की होड़

छत्तीसगढ़ में दशहरा कई रूपों में मनाया जाता है. बस्तर का लंबा उत्सव जितना मशहूर है, उतनी ही अनोखी है सारंगढ़ की गढ़ विच्छेदन परंपरा. विजयादशमी के दिन यहां मिट्टी का एक ऊंचा गढ़ बनाया जाता है. युवा उस पर चढ़ने की होड़ लगाते हैं. जो सबसे पहले चोटी छू ले, वही विजेता. 2026 में दशहरा 20 अक्टूबर को है, और सारंगढ़ में इसकी तैयारी जल्द शुरू होगी.

गढ़ विच्छेदन है क्या

गढ़ विच्छेदन सारंगढ़ की एक पुरानी दशहरा परंपरा है. इसमें राजमहल की मिट्टी से शंकु के आकार का ऊंचा गढ़ बनाया जाता है. प्रतिभागी इस फिसलन भरे ढांचे पर चढ़ते हैं. सबसे पहले ऊपर पहुंचने वाले को नकद इनाम और शील्ड दी जाती है. यह आयोजन रियासत काल से चला आ रहा है.

परंपरा

1. यह आयोजन सारंगढ़-बिलाईगढ़ ज़िले के सारंगढ़ में होता है.

2. इसका समय शारदीय नवरात्रि के बाद विजयादशमी का दिन है.

3. प्रतियोगिता का मुकाबला मिट्टी के गढ़ पर सबसे पहले चढ़ना है.

4. दर्शकों की संख्या ज़िला प्रशासन के अनुसार 10 से 20 हज़ार तक रहती है.

5. विजेता को नकद इनाम और शील्ड मिलती है.

6. इसे सौ साल से ज़्यादा पुरानी परंपरा बताया जाता है.

किले पर चढ़ाई का पूरा नज़ारा

तैयारी

दशहरे से पहले राजमहल परिसर की मिट्टी जुटाई जाती है. उससे एक ऊंचा, नुकीला ढेर तैयार होता है, जिसे गढ़ कहा जाता है. इसकी ढलान इस तरह रखी जाती है कि चढ़ना चुनौती बन जाए.

मुकाबला

संकेत मिलते ही युवा दौड़ पड़ते हैं. मिट्टी पैरों के नीचे से खिसकती है. कोई आधे रास्ते से फिसलकर नीचे आता है. कोई दोबारा कोशिश करता है. भीड़ का शोर हर कोशिश के साथ बढ़ता जाता है.

जीत

आखिरकार कोई एक प्रतिभागी चोटी तक पहुंच जाता है. उसे पूरे सम्मान के साथ इनाम दिया जाता है. कई युवा सालों तक इस जीत का सपना देखते हैं.

गढ़ विच्छेदन परंपरा की जड़ें

राजा की सेना से जुड़ा किस्सा

सारंगढ़ कभी एक रियासत था. ज़िला प्रशासन की जानकारी के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत स्थानीय राजपरिवार ने की थी. पुराने समय में इस होड़ में जीतने वाले बहादुर युवाओं को राजा की सेना में शामिल किया जाता था. यानी यह एक तरह की भर्ती परीक्षा भी थी.

राजपरिवार की भूमिका आज भी

रियासतें खत्म हो गईं, पर परंपरा चलती रही. पूर्व राजपरिवार आज भी इस आयोजन का हिस्सा है. स्थानीय लोग इसे अपनी पहचान और गौरव से जोड़कर देखते हैं.

रावण दहन के साथ जुड़ा उत्सव

गढ़ विच्छेदन के अलावा यहां दशहरे की दूसरी रस्में भी होती हैं. राम और रावण की सेनाओं के बीच प्रतीकात्मक युद्ध दिखाया जाता है. इसके बाद रावण के पुतले का दहन होता है. आसपास के गांवों से लोग पूरे परिवार के साथ पहुंचते हैं. खिलौने, मिठाई और खाने-पीने की दुकानें मेले जैसा माहौल बनाती हैं.

छत्तीसगढ़ के दशहरों की विविधता

छत्तीसगढ़ में दशहरा हर इलाके में अलग अंदाज़ में मनाया जाता है:

  • बस्तर: लगभग 75 दिन चलने वाला उत्सव, देवी दंतेश्वरी की आराधना और रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध.
  • सारंगढ़: मिट्टी के गढ़ पर चढ़ने की होड़.
  • शहरों में: बड़े मैदानों में रावण दहन और आतिशबाज़ी.

यही विविधता राज्य की लोक संस्कृति को खास बनाती है.

अगर आप देखने जाना चाहते हैं

यात्रा की योजना

सारंगढ़ तक सड़क से पहुंचा जा सकता है. रायगढ़ सबसे नज़दीकी बड़ा रेलवे स्टेशन है. रायपुर और बिलासपुर से भी बसें चलती हैं. त्योहार के दिन भीड़ के कारण वाहन मिलने में दिक्कत हो सकती है. इसलिए लौटने का इंतज़ाम पहले से कर लें.

भीड़ में सुरक्षित कैसे रहें

  • बच्चों का हाथ पकड़कर रखें और उनकी जेब में घर का फोन नंबर लिखी पर्ची रखें.
  • मोबाइल और पर्स संभालकर रखें.
  • गढ़ के बहुत पास खड़े न हों, क्योंकि फिसलते प्रतिभागी चोटिल कर सकते हैं.
  • आयोजकों और पुलिस के निर्देशों का पालन करें.

घूमने की और जगहें

सारंगढ़ में गिरि विलास महल रियासत की याद दिलाता है. पास ही गोमर्डा अभयारण्य है, जो प्रकृति प्रेमियों को पसंद आ सकता है.

गढ़ पर चढ़ने वालों के लिए सावधानी

मिट्टी के गढ़ पर चढ़ना रोमांचक है, पर जोखिम भी है. आरामदायक कपड़े पहनें. पहले हल्का व्यायाम करके शरीर को तैयार करें. दूसरों को धक्का देने से बचें. चोट लगे तो मौके पर मौजूद प्राथमिक चिकित्सा की मदद लें.

परंपरा का संदेश

गढ़ विच्छेदन सिर्फ एक खेल नहीं है. यह हिम्मत, धैर्य और बार-बार कोशिश करने की सीख देता है. फिसलकर गिरना और फिर उठकर चढ़ना, यही इसकी असली भावना है. इस दशहरे यह परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का रंग फिर दिखाएगी.

स्कूलों और कॉलेजों के छात्र भी ऐसी परंपराओं के बारे में जानकर अपने इलाके के इतिहास से जुड़ सकते हैं. शिक्षक चाहें तो दशहरे की छुट्टी से पहले बच्चों को इस आयोजन की कहानी सुना सकते हैं. परिवार के बुज़ुर्गों से पुराने आयोजनों की यादें सुनना भी एक अच्छा अनुभव होगा. इस तरह लोक परंपराएं अगली पीढ़ी तक पहुंचती रहती हैं.

अस्वीकरण: यह जानकारी ज़िला प्रशासन की वेबसाइट और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है. आयोजन की तारीख, समय और नियम बदल सकते हैं. यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन से पुष्टि कर लें. प्रतियोगिता में भाग लेते समय सामान्य सुरक्षा उपाय अपनाएं.

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