अरुणाचल सीमा विवाद पर बड़ा बयान, रिजिजू ने साफ की स्थिति

किरेन रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चीन से जुड़े 60 किलोमीटर कब्जे के दावे पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने ऐसे दावों को तथ्यात्मक स्थिति से अलग बताया। रिजिजू के अनुसार, अरुणाचल सीमा विवाद से जुड़े विषय को समझने के लिए जमीनी परिस्थितियों को देखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा के कई हिस्सों में अभी औपचारिक सीमांकन नहीं हुआ है। इसलिए कुछ क्षेत्रों में दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं। वहीं, सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की चिंताओं को उन्होंने गंभीर विषय बताया।

रिजिजू ने अपुष्ट तस्वीरों और वीडियो के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गलत सूचनाओं से भ्रम की स्थिति बन सकती है। साथ ही, ऐसी सामग्री सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के मनोबल को प्रभावित कर सकती है।

सीमा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे पर सरकार का जोर

केंद्रीय मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान सीमा क्षेत्रों में सड़क निर्माण को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली।

उनके मुताबिक, चीन ने अपनी तरफ सड़क और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया। दूसरी ओर, भारत के कई सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय तक संपर्क सुविधाएं सीमित रहीं।

रिजिजू ने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद स्थिति में बदलाव आया। उनके अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों तक सड़क पहुंचाने और संपर्क मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

अरुणाचल सीमा विवाद में सड़क संपर्क की भूमिका

रिजिजू ने माजा और ताकसिंग जैसे सीमावर्ती इलाकों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में सड़क निर्माण के बाद पहुंच बेहतर हुई है। ताकसिंग तक वर्ष 2019 में सड़क पहुंचने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

सीमा क्षेत्रों में बेहतर संपर्क से प्रशासनिक पहुंच मजबूत होती है। इसके अलावा, स्थानीय लोगों की आवाजाही भी आसान होती है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी बेहतर बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या चीन ने भारतीय गांवों पर कब्जा किया?

रिजिजू ने भारतीय गांवों पर चीन के कब्जे के दावे को सही नहीं माना। उन्होंने कहा कि सीमांकन स्पष्ट नहीं होने से कुछ क्षेत्रों को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर दोनों पक्ष अपनी-अपनी जमीन का दावा करते हैं। इसलिए ऐसे मामलों को केवल कब्जे के दावे के रूप में देखना उचित नहीं है।

उन्होंने लोंगजू के आगे एक क्षेत्र का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, वहां चीनी सेना ने गांव जैसे ढांचे तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को लेकर ऐतिहासिक रूप से भी विवाद रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था और गश्त पर क्या कहा?

अरुणाचल सीमा विवाद में सुरक्षा बलों की भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने माना कि कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चीनी गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की गश्त को मजबूत किया गया है।

सीमा पर सुरक्षा बल लगातार निगरानी रखते हैं। साथ ही, संवेदनशील क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है।

रिजिजू ने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालने से बचने की अपील की।

गलत तस्वीरों और वीडियो पर जताई चिंता

रिजिजू ने राजनीतिक बहस के दौरान गलत सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ पुराने या असंबंधित वीडियो को भारत-चीन सीमा से जोड़कर प्रसारित किया गया।

उनके मुताबिक, ऐसी सामग्री से लोगों के बीच गलत धारणा बन सकती है। इसलिए सीमा से जुड़े संवेदनशील मामलों में तथ्यों की पुष्टि जरूरी है।

आगे क्या है सरकार की प्राथमिकता?

मुख्य प्राथमिकताएं:

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क सुविधाओं का विस्तार।
  • संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा निगरानी मजबूत करना।
  • स्थानीय ग्रामीणों की चिंताओं पर ध्यान देना।
  • सीमा से जुड़े दावों की तथ्यात्मक जांच करना।
  • गलत सूचना के प्रसार को रोकना।

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