जनगणना विवाद को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने जाति से जुड़े सवालों के प्रारूप पर आपत्ति जताई। कांग्रेस का आरोप है कि जाति की जानकारी दर्ज करने का तरीका उचित नहीं है।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि जाति से जुड़े सवालों की संरचना को लेकर गंभीर प्रश्न हैं। पार्टी ने सरकार से इस व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है।
रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला भी दिया। इसमें जनगणना के दौरान परिवार से जुड़ी कई जानकारियां दर्ज करने का दावा किया गया है। इनमें माता-पिता का धर्म, जन्म तिथि और जन्म स्थान शामिल बताए गए हैं।
धर्म और जन्मस्थान से जुड़े सवालों पर भी घमासान
कांग्रेस ने केवल जाति संबंधी सवालों तक अपनी आपत्ति सीमित नहीं रखी। पार्टी ने धर्म और माता-पिता के जन्मस्थान से जुड़ी जानकारी पर भी सवाल उठाया।
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित प्रश्नावली में जाति बताने के लिए खुला विकल्प रखा गया है। इसके साथ ही जाति नहीं बताने और कोई जाति नहीं होने जैसे विकल्पों का भी उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि इतनी विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। पार्टी ने यह भी सवाल किया कि ऐसी जानकारी के संग्रह का उद्देश्य क्या है।
2021 के हलफनामे का मुद्दा फिर उठा
जनगणना विवाद में कांग्रेस ने सितंबर 2021 के सुप्रीम कोर्ट हलफनामे को महत्वपूर्ण आधार बनाया है। जयराम रमेश ने हलफनामे के एक हिस्से का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल उठाए।
उनके अनुसार, हलफनामे में जातियों का रजिस्टर तैयार करने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई थी। इसमें जातियों की पहचान के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू का सुझाव भी बताया गया था।
कांग्रेस ने इसी बिंदु को आधार बनाकर मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल किया है। पार्टी का कहना है कि यदि ऐसा विकल्प पहले सुझाया गया था, तो अब इसे शामिल क्यों नहीं किया गया।
जनगणना विवाद में ड्रॉप-डाउन विकल्प क्यों अहम?
जातियों की पहचान के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू का उपयोग डेटा संग्रह को अधिक व्यवस्थित कर सकता है। कांग्रेस ने इसी तर्क के आधार पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
पार्टी के अनुसार, खुले विकल्प से जातियों के नाम अलग-अलग तरीके से दर्ज हो सकते हैं। इससे बाद में आंकड़ों को व्यवस्थित करने में कठिनाई आ सकती है।
हालांकि, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग पहलुओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है। इससे जनगणना प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान हो सकता है।
सरकार की नीति पर कांग्रेस के पुराने आरोप
कांग्रेस ने इससे पहले भी जाति जनगणना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। पार्टी ने आरोप लगाया था कि सरकार इस प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 30 अप्रैल 2025 की घोषणा का भी उल्लेख किया। पार्टी का दावा है कि इसके बाद जाति आधारित गणना को लेकर सरकार की नीति में बदलाव आया।
विपक्षी दल अब मौजूदा प्रश्नावली को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देख रहा है। दूसरी ओर, जनगणना जैसे व्यापक अभ्यास में सवालों की संरचना और डेटा सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय हैं।
आगे क्या होगा?
इस मुद्दे पर सरकार की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद तस्वीर और साफ होगी। खासतौर पर जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा।
साथ ही, धर्म और माता-पिता से संबंधित जानकारी के दायरे को लेकर भी चर्चा जारी रह सकती है। जनगणना की गोपनीयता और आंकड़ों की विश्वसनीयता भी अहम मुद्दे हैं।
एक नजर में
- कांग्रेस ने प्रश्नावली की संरचना पर आपत्ति जताई।
- जाति संबंधी विकल्पों को लेकर सवाल उठाए गए।
- धर्म और जन्मस्थान की जानकारी पर स्पष्टीकरण मांगा गया।
- 2021 के सुप्रीम कोर्ट हलफनामे का हवाला दिया गया।
- ड्रॉप-डाउन मेनू की व्यवस्था पर विशेष सवाल उठाया गया।
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