महासमुंद जिले में धरती आबा अभियान के अंतर्गत तकनीकी सहयोगी संस्थाओं, सिविल सोसायटी संगठनों और स्थानीय संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह पहल वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। इच्छुक संस्थाएं 10 अगस्त 2026 तक आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं।
मुख्य बातें
- 10 अगस्त 2026 तक आवेदन आमंत्रित।
- तकनीकी सहयोगी संस्थाओं का किया जाएगा चयन।
- सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना तैयार होगी।
- ग्राम सभाओं को तकनीकी सहायता मिलेगी।
- भारत सरकार वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराएगी।
धरती आबा अभियान से मजबूत होगा वन प्रबंधन
कार्यालय कलेक्टर आदिवासी विकास महासमुंद द्वारा जारी सूचना के अनुसार चयनित संस्थाएं ग्राम सभाओं के साथ मिलकर सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना तैयार करेंगी। साथ ही इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगी।
यह प्रक्रिया भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जाएगी। इसलिए चयनित संस्थाओं की भूमिका ग्रामीण समुदायों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण होगी।
धरती आबा अभियान के तहत निभानी होंगी अहम जिम्मेदारियां
चयनित संस्थाओं को ग्राम सभाओं का क्षमता विकास करना होगा। इसके अलावा वन भूमि का सर्वेक्षण, प्राकृतिक संसाधनों और लघु वनोपज की मैपिंग तथा जैव विविधता का दस्तावेजीकरण भी करना होगा।
साथ ही सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों को तकनीकी हैंडहोल्डिंग उपलब्ध कराई जाएगी। इससे योजनाओं का बेहतर संचालन और संसाधनों का टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
ग्राम सभाओं को मिलेगा तकनीकी सहयोग
इस पहल से वन संसाधनों के संरक्षण के साथ जनजातीय क्षेत्रों में स्थानीय भागीदारी भी मजबूत होगी। योजनाओं के माध्यम से ग्राम सभाएं अपने संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सकेंगी।
राज्य और केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि समुदाय आधारित वन प्रबंधन को बढ़ावा मिले। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और ग्रामीण विकास दोनों को नई गति मिलेगी।
प्रमुख अपडेट
- आवेदन की अंतिम तिथि 10 अगस्त 2026।
- तकनीकी संस्थाओं का चयन किया जाएगा।
- ग्राम सभाओं को तकनीकी मार्गदर्शन मिलेगा।
- वन संसाधनों की मैपिंग और दस्तावेजीकरण होगा।
- भारत सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
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