मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव 2026 में हिस्सा लिया। उन्होंने राज्य में निवेश की संभावनाओं पर बात की। साथ ही उद्योग, ऊर्जा और पर्यटन को लेकर सरकार की दिशा बताई।
विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को लेकर मुख्यमंत्री ने विजन डॉक्यूमेंट 2047 का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य को तय लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार विकास कार्यों को मिशन मोड में करने की बात कहती है।
विकसित छत्तीसगढ़ में उद्योग और ऊर्जा पर फोकस
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने स्टील उत्पादन और बिजली को विकास का अहम आधार बताया।
राज्य में फिलहाल करीब 20 प्रतिशत राष्ट्रीय स्टील उत्पादन का योगदान बताया गया। सरकार ने 2030 तक स्टील उत्पादन को 45 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा है। ऊर्जा क्षेत्र में भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना बताई गई।
छत्तीसगढ़ में कोयला उत्पादन भी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य करीब 20 प्रतिशत कोयला उत्पादन करता है। वर्तमान बिजली उत्पादन करीब 30 हजार मेगावाट बताया गया।
इसके अलावा एनर्जी समिट में करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आने की बात कही गई। मुख्यमंत्री ने भविष्य में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य भी बताया।
विकसित छत्तीसगढ़ के लिए नई उद्योग नीति
मुख्यमंत्री ने राज्य की नई औद्योगिक नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने निवेशकों के लिए कई प्रोत्साहनों की जानकारी दी।
नीति के तहत पूंजी निवेश और ब्याज पर सब्सिडी का प्रावधान है। तकनीक खरीदने पर भी सहायता देने की बात कही गई है। स्टांप ड्यूटी में छूट जैसे प्रावधान भी बताए गए।
पावर, आईटी, स्टील, टेक्सटाइल, फार्मा और फूड प्रोसेसिंग को प्राथमिकता वाले क्षेत्र बताया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार नई उद्योग नीति के तहत 8.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
बस्तर में पर्यटन की संभावनाओं पर जोर
कॉन्क्लेव में बस्तर के पर्यटन पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति को सामने लाने की जरूरत बताई।
बस्तर जैव विविधता और प्राकृतिक स्थलों से समृद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में बदलते हालात के साथ पर्यटन की नई संभावनाएं बन रही हैं। सड़क, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी इस दिशा में अहम बताया गया।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बस्तर की सकारात्मक तस्वीर देश-दुनिया तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की प्रकृति, संस्कृति और पर्यटन स्थलों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।
पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिल सकता है। होटल, होम-स्टे, परिवहन और स्थानीय खान-पान में अवसर बढ़ सकते हैं। हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को भी बाजार मिलने की संभावना है।
लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को भी बताया अहम
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने राज्य को लॉजिस्टिक्स के लिहाज से उपयोगी बताया।
राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल नेटवर्क के विस्तार से परिवहन सुविधाओं को मजबूती मिलने की बात कही गई। राज्य ने लॉजिस्टिक्स नीति भी तैयार की है।
कुल मिलाकर, विकसित छत्तीसगढ़ के एजेंडे में उद्योग के साथ पर्यटन को भी जगह दी जा रही है। निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और स्थानीय रोजगार पर जोर दिखाई देता है।
बस्तर को पर्यटन के नए क्षेत्र के रूप में विकसित करने की चर्चा भी इसी दिशा का हिस्सा है। इससे स्थानीय युवाओं, महिलाओं और कारोबार से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर बनने की संभावना बताई गई है।
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