राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक की गई है। रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत की गई, जिसमें गणना प्रक्रिया के दौरान चोरी और गबन की घटनाओं की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा नियमों को कमजोर किए जाने से आरोपियों को चोरी करने का अवसर मिला।
SIT ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है और अंतिम रिपोर्ट में प्रशासनिक जवाबदेही, सुरक्षा खामियों तथा सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
CCTV फुटेज में 70 बार चोरी की घटनाएं दर्ज
रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध CCTV फुटेज में गणना कर्मियों द्वारा करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने की घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि 27 अप्रैल 2025 से पहले भी चोरी होती रही, लेकिन उस अवधि का CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण वास्तविक नुकसान का आकलन नहीं किया जा सका।
SIT का कहना है कि आरोपियों के बयान और बैंक खातों में आय से अधिक धन मिलने के संकेत भी जांच का महत्वपूर्ण आधार बने हैं।
सुरक्षा नियमों में बदलाव बना चोरी की बड़ी वजह
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच में सामने आया कि 6 फरवरी 2025 को लागू एसओपी (SOP) में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों को शिथिल कर दिया गया था। पहले प्रत्येक कर्मचारी की अनिवार्य तलाशी का प्रावधान था, जिसे बाद में नियमित या रैंडम जांच में बदल दिया गया।
इसके अलावा निर्धारित वेशभूषा, निजी सामान पर रोक, हुंडीवार गणना और मूल्यवर्ग के अनुसार रिकॉर्ड रखने जैसी व्यवस्थाओं का भी पूरी तरह पालन नहीं किया गया। SIT ने इन बदलावों को चोरी की बड़ी वजह माना है।
किन अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल?
रिपोर्ट में ट्रस्ट प्रतिनिधि डॉ. अनिल मिश्रा पर प्रभावी निगरानी नहीं करने का आरोप लगाया गया है। वहीं गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सुरक्षा व्यवस्था लागू न कराने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार माना गया है।
इसके अलावा रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट के अनुसार उनके पास मंदिर परिसर की विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिए कोई औपचारिक अनुमति नहीं थी। उन्होंने अपने रिश्तेदार की गणना ड्यूटी में सिफारिश भी की, जिससे कथित गबन का अवसर मिला।
हालांकि रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल नगरकोटे का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे इस पहलू पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बैंक और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर टिप्पणी
SIT ने बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बैंक की ओर से कर्मचारियों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई और मासिक अधिकारी रोटेशन का भी पालन नहीं हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि संवेदनशील गणना कक्ष का CCTV बैकअप केवल 45 दिनों तक रखा जाता था, जबकि ऑडिट में 180 दिनों तक फुटेज सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी। यदि निगरानी समय पर की जाती, तो कई घटनाओं को रोका जा सकता था।
ट्रस्ट ने दोषियों पर कठोर कार्रवाई का दिया भरोसा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर ट्रस्ट ने कहा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ट्रस्ट के अनुसार मामले की जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया गया था, जिसके बाद उच्चस्तरीय SIT का गठन हुआ।
ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य केवल दोषियों की पहचान करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए चढ़ावा प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना भी है।
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