Letter to PM Modi एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत भारत और पाकिस्तान की 117 प्रमुख हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संयुक्त पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच संवाद, सहयोग और सामान्य रिश्ते बहाल करने की अपील की है।
पत्र में कहा गया है कि लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी दोनों देशों के युवाओं के भविष्य, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता पर नकारात्मक असर डाल रही है।
महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा?
महबूबा मुफ्ती ने Letter to PM Modi का समर्थन करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर मुद्दे का समाधान केवल बातचीत से ही संभव है। उन्होंने आरएसएस नेताओं दत्तात्रेय होसबाले और मोहन भागवत के हालिया बयानों का हवाला देते हुए कहा कि संवाद का रास्ता अपनाना समय की जरूरत है।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध कथन “दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं” को दोहराते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली पर जोर दिया।
भाजपा ने क्यों जताई आपत्ति?
इस पहल पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हुए बिना पाकिस्तान से बातचीत उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति और पाकिस्तान से जुड़े सभी फैसले केवल केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
पत्र में किन मांगों पर दिया गया जोर?
Letter to PM Modi में दोनों देशों की सरकारों से कई महत्वपूर्ण मांगें की गई हैं—
- भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता शुरू की जाए।
- नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की दोबारा नियुक्ति हो।
- सामान्य वीजा सेवाएं बहाल की जाएं।
- अटारी-वाघा सीमा व्यापार और यात्रा के लिए फिर से खोली जाए।
- दिल्ली-लाहौर बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा दोबारा शुरू की जाए।
- करतारपुर साहिब कॉरिडोर और शारदा पीठ तक आसान पहुंच सुनिश्चित की जाए।
- व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जीवित किया जाए।
117 हस्ताक्षरकर्ताओं में कौन-कौन शामिल?
इस संयुक्त अपील पर भारत के 61 और पाकिस्तान के 56 नागरिकों ने हस्ताक्षर किए हैं। प्रमुख भारतीय हस्ताक्षरकर्ताओं में—
- महबूबा मुफ्ती
- फारूक अब्दुल्ला
- मीरवाइज उमर फारूक
- मनोज झा
- हुमायूं कबीर
वहीं पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, इस्फान्यार भंडारा और परमाणु वैज्ञानिक परवेज हुदभोय जैसे नाम शामिल हैं।
संवाद और सहयोग पर क्यों दिया गया जोर?
Letter to PM Modi में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान की संयुक्त आबादी दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत है, जिसमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। ऐसे में लगातार तनाव और टकराव दोनों देशों के विकास में बाधा बन रहा है।
पत्र में सीमा पार संपर्क बढ़ाने, शिक्षा, पत्रकारिता, संस्कृति और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने तथा जम्मू-कश्मीर सहित सभी लंबित मुद्दों पर शांतिपूर्ण बातचीत शुरू करने की अपील की गई है।
विश्वास बहाली के लिए सुझाए गए कदम
पत्र में दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए कई सुझाव दिए गए हैं—
- राजनयिक संबंध पूरी तरह बहाल किए जाएं।
- वाणिज्यिक उड़ानों की अनुमति दी जाए।
- यात्रा प्रतिबंधों में ढील दी जाए।
- मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगी पाबंदियां कम की जाएं।
- धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्राओं को आसान बनाया जाए।
- सीमा पार व्यापार को फिर से सक्रिय किया जाए।
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