देश में वकालत के पेशे में प्रवेश करने वाले हजारों युवा अधिवक्ताओं के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण पहल का सुझाव दिया है। अदालत ने माना कि आर्थिक संघर्ष के कारण कई प्रतिभाशाली वकील शुरुआती वर्षों में पेशा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड स्थापित करने की आवश्यकता बताई गई है।
क्यों जरूरी है यह फंड?
सुप्रीम Court ने कहा कि पहली पीढ़ी के वकीलों के सामने शुरुआत में कई कठिनाइयाँ होती हैं। उन्हें न तो पर्याप्त मुवक्किल मिलते हैं और न ही स्थिर आय का स्रोत। ऐसे में यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड युवा अधिवक्ताओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का माध्यम बन सकता है।
ब्रेन ड्रेन रोकने पर जोर
अदालत ने चिंता जताई कि आर्थिक अस्थिरता के कारण कई प्रतिभाशाली युवा वकील दूसरे क्षेत्रों में करियर चुन लेते हैं। इससे न्याय व्यवस्था को योग्य पेशेवरों का नुकसान उठाना पड़ता है।
महिला वकीलों की चुनौतियों पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान महिला अधिवक्ताओं की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि महिला वकीलों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक कार्य वातावरण मिलना चाहिए।
बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता
अदालत के अनुसार कोर्ट परिसरों में महिलाओं के लिए विश्राम कक्ष, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास आवश्यक है ताकि वे पेशे में लंबे समय तक सक्रिय रह सकें।
फंड के लिए धन कहाँ से आएगा?
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड को सीनियर वकीलों के स्वैच्छिक योगदान, कोर्ट फीस के एक हिस्से और अदालतों द्वारा लगाए गए जुर्मानों की राशि से मजबूत बनाया जा सकता है।
दानदाताओं को मिलेगा प्रोत्साहन
कोर्ट ने कहा कि इस फंड में योगदान देने वाले वरिष्ठ अधिवक्ताओं को टैक्स छूट, राष्ट्रीय सम्मान या अन्य प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। इससे अधिक लोग इस पहल से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
सात वर्षों तक मिलेगी सहायता
प्रस्तावित योजना के तहत पात्र युवा वकीलों को शुरुआती तीन वर्षों तक नियमित मासिक वजीफा दिया जाएगा। इसके बाद अगले चार वर्षों में सहायता राशि धीरे-धीरे कम होती जाएगी।
‘पे-इट-बैक’ मॉडल की खासियत
यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड का एक महत्वपूर्ण पहलू ‘पे-इट-बैक’ मॉडल है। इसके तहत जब लाभार्थी वकील आर्थिक रूप से स्थापित हो जाएंगे, तो वे किश्तों में राशि वापस जमा कर सकेंगे, जिससे भविष्य की पीढ़ियों को भी लाभ मिलेगा।
न्याय व्यवस्था को होगा दीर्घकालिक फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो प्रतिभाशाली युवाओं को वकालत में बने रहने की प्रेरणा मिलेगी। इससे न्यायिक व्यवस्था को बेहतर मानव संसाधन उपलब्ध होगा और कानूनी पेशे में विविधता भी बढ़ेगी।
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