शहरी विकास परियोजनाएं: नवा रायपुर में निवेश को मिलेगी रफ्तार

शहरी विकास परियोजनाएं

छत्तीसगढ़ में शहरी विकास परियोजनाएं मजबूत करने के लिए राज्य सरकार नई पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 21 अक्टूबर को नवा रायपुर में क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। यह कार्यशाला अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग पर केंद्रित होगी।

कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू होगा। इसमें देशभर के शहरी विकास और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यशाला में आधुनिक अधोसंरचना के विस्तार पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, शहरों के लिए निवेश जुटाने के नए तरीकों पर विचार होगा।

इस पहल का उद्देश्य नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाना है। इससे शहरों के सुनियोजित और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

हुडको और सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ होंगे एमओयू

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, हुडको और सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ समझौते करेगा।

इन समझौतों से शहरी नियोजन और वित्तीय प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके अलावा, नगरीय निकायों की संस्थागत क्षमता मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा। निवेश आधारित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में भी इनका महत्व रहेगा।

कार्यशाला का आयोजन नवा रायपुर स्थित होटल मेफेयर लेक रिसॉर्ट में होगा। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू भी इसमें शामिल होंगे। उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव विशिष्ट अतिथि रहेंगे।

शहरी विकास परियोजनाओं के लिए जुटेंगे नए वित्तीय संसाधन

कार्यशाला में अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो पर विशेष चर्चा होगी। इन माध्यमों से शहरी परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

विशेषज्ञ नगरीय निकायों को निवेश योग्य परियोजनाएं तैयार करने के तरीके बताएंगे। इसके साथ ही, परियोजनाओं की वित्तीय योजना और दीर्घकालिक प्रबंधन पर मार्गदर्शन मिलेगा।

चर्चा में म्युनिसिपल बॉन्ड और सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल भी शामिल होंगे। इन तरीकों से शहरों में सड़क, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए निवेश जुटाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

म्युनिसिपल बॉन्ड और पीपीपी मॉडल पर चर्चा

म्युनिसिपल बॉन्ड नगरीय निकायों के लिए धन जुटाने का एक वित्तीय माध्यम है। वहीं, पीपीपी मॉडल में सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं।

कार्यशाला में किफायती आवास परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने पर भी चर्चा होगी। विशेषज्ञ परियोजनाओं की योजना से लेकर उनके क्रियान्वयन तक के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाएंगे।

तीन तकनीकी सत्रों में साझा होंगे अनुभव

दोपहर 12 बजे से कार्यशाला के अंतर्गत तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें विभिन्न राज्यों और संस्थानों के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे।

  • पहला सत्र: अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो की कार्यप्रणाली पर प्रस्तुति होगी। तेलंगाना की सचिव डॉ. टी.के. श्रीदेवी शहरी बदलाव से जुड़े अनुभव साझा करेंगी।
  • दूसरा सत्र: परियोजनाओं की अवधारणा, निर्माण प्रक्रिया और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन यानी डीपीआर तैयार करने पर चर्चा होगी। बैंकेबल प्रोजेक्ट और पीपीपी मॉडल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

तीसरे तकनीकी सत्र में भी शहरी विकास के वित्तीय मॉडल और निवेश संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी में इस सत्र के वक्ताओं और विस्तृत विषयों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।

नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

राज्य सरकार का लक्ष्य नगरीय निकायों की वित्तीय क्षमता बढ़ाना और विकास कार्यों के लिए नए संसाधन जुटाना है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से परियोजनाओं की तैयारी और वित्तीय नियोजन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

शहरी विकास परियोजनाएं आगे बढ़ाने के लिए निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रभावी वित्तीय प्रबंधन महत्वपूर्ण हैं। नवा रायपुर की यह कार्यशाला इन विषयों पर अनुभव साझा करने का अवसर देगी। प्रस्तावित एमओयू भी शहरी नियोजन और अधोसंरचना विकास में संस्थागत सहयोग बढ़ाने की दिशा में अहम कदम होंगे।

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