भारत की महिला युगल जोड़ी ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में बड़ा कमाल किया है। त्रिसा गायत्री ने क्वार्टर फाइनल में चीन की मजबूत जोड़ी को शिकस्त दी। इस जीत के साथ भारतीय जोड़ी सेमीफाइनल में पहुंच गई है। साथ ही भारत का महिला युगल पदक भी पक्का हो गया है।
भारतीय जोड़ी ने जिया यी फान और झांग शु शियान को हराया। चीन की यह जोड़ी टूर्नामेंट में चौथी वरीयता प्राप्त थी। मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने 16-21, 21-15, 21-13 से जीत दर्ज की। यह मुकाबला नई दिल्ली में खेला गया।
पहले गेम में पिछड़ने के बाद जोरदार वापसी
मुकाबले की शुरुआत भारतीय जोड़ी के लिए आसान नहीं रही। चीनी खिलाड़ियों ने शुरुआती दौर में दबाव बनाया। उन्होंने पहला गेम 21-16 से अपने नाम किया।
इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने रणनीति में बदलाव किया। दूसरे गेम में डिफेंस काफी मजबूत दिखाई दिया। नेट के पास आक्रामक खेल ने भी भारतीय जोड़ी को फायदा पहुंचाया। उन्होंने दूसरा गेम 21-15 से जीतकर मुकाबला बराबरी पर ला दिया।
निर्णायक गेम में त्रिसा गायत्री ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा। भारतीय जोड़ी ब्रेक तक 11-5 से आगे थी। इसके बाद उन्होंने बढ़त बनाए रखी। तीसरा गेम 21-13 से जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
विश्व नंबर चार जोड़ी को हराना बड़ी उपलब्धि
इस जीत की खास बात भारतीय जोड़ी का पुराना रिकॉर्ड भी है। इससे पहले वह चीनी जोड़ी के खिलाफ तीनों मुकाबले हार चुकी थी। इस बार दोनों खिलाड़ियों ने पुराने नतीजों को पीछे छोड़ दिया।
भारतीय जोड़ी ने इससे पहले जापान की सातवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी को हराया था। रिन इवानागा और की नाकानिशी के खिलाफ मुकाबला सीधे गेम में जीता गया। भारतीय खिलाड़ियों ने 21-16, 21-12 से जीत दर्ज की थी।
सेमीफाइनल में हार के बावजूद मिलेगा पदक
विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में सेमीफाइनल हारने वाले खिलाड़ियों को कांस्य पदक मिलता है। इस प्रतियोगिता में तीसरे स्थान के लिए अलग मुकाबला नहीं कराया जाता। इसलिए सेमीफाइनल में हार के बावजूद भारतीय जोड़ी का पदक सुरक्षित रहेगा।
त्रिसा गायत्री की इस उपलब्धि ने भारत के महिला युगल अभियान को नई पहचान दी है। इससे पहले भारत ने इस वर्ग में 2011 में पदक जीता था। तब ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने कांस्य पदक हासिल किया था।
भारत का पदक सिलसिला भी बरकरार
इस जीत के साथ भारत का विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने का सिलसिला जारी है। भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार कई संस्करणों में कम से कम एक पदक हासिल किया है।
भारत के लिए विश्व चैंपियनशिप में पहला पदक प्रकाश पादुकोण ने 1983 में जीता था। पीवी सिंधु भारत को इस प्रतियोगिता में एकमात्र स्वर्ण पदक दिला चुकी हैं।
मुकाबले के अहम पड़ाव:
- चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी को हराया।
- पहला गेम भारतीय जोड़ी ने 16-21 से गंवाया।
- दूसरे गेम में 21-15 से शानदार वापसी की।
- निर्णायक गेम 21-13 से अपने नाम किया।
- सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्का किया।
अब सेमीफाइनल पर टिकी नजरें
त्रिसा गायत्री की जोड़ी अब सेमीफाइनल मुकाबले की तैयारी करेगी। क्वार्टर फाइनल में मिली जीत से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा होगा। चोट से वापसी के बाद भी जोड़ी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
दोनों खिलाड़ी पहले भी बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं। वे 2022 और 2023 में ऑल इंग्लैंड ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंची थीं। 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी दोनों ने कांस्य पदक जीता था।
सात्विक-चिराग से भी पदक की उम्मीद
भारत के पास इस चैंपियनशिप में दूसरा पदक जीतने का मौका भी है। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी पुरुष युगल में चुनौती पेश कर रहे हैं।
भारतीय जोड़ी ने प्री-क्वार्टर फाइनल में मलेशिया के जुनैदी आरिफ और रॉय किंग याप को हराया था। उन्होंने यह मुकाबला 21-23, 21-19, 21-17 से जीता। अब उनका सामना चीन की तीसरी वरीयता प्राप्त लियांग वेई केंग और वांग चांग की जोड़ी से है।
चैंपियनशिप में भारतीय जोड़ी का सफर:
- राउंड ऑफ-16 में जापानी जोड़ी को हराया।
- क्वार्टर फाइनल में चीन की चौथी वरीयता को मात दी।
- तीन गेम के रोमांचक मुकाबले में जीत दर्ज की।
- सेमीफाइनल में पहुंचकर कांस्य पदक पक्का किया।
- अब भारतीय जोड़ी की नजर फाइनल में जगह बनाने पर है।
त्रिसा गायत्री की यह जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए अहम उपलब्धि है। महिला युगल में लंबे अंतराल के बाद भारत को विश्व चैंपियनशिप पदक मिला है। अब भारतीय प्रशंसकों की नजर सेमीफाइनल मुकाबले पर रहेगी।
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