मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को सुकमा का दौरा किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने शबरीनगर, श्रीनगर और लाइनपारा का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट के समय सरकार परिवारों के साथ है। उन्होंने अधिकारियों को तेजी से सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए। साथ ही राहत और पुनर्वास में कमी नहीं रखने को कहा।
राहत शिविर में प्रभावित लोगों से मिले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री शबरीनगर के राहत एवं स्वास्थ्य शिविर पहुंचे। उन्होंने वहां भोजन और पेयजल की व्यवस्था देखी। स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी भी अधिकारियों से ली। इसके बाद उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में लोगों को भोजन भी परोसा। उन्होंने परिवारों की जरूरतों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने प्रभावित लोगों का हौसला भी बढ़ाया।
मकानों और सामान के नुकसान का होगा आकलन
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के घरों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने नुकसान की जानकारी परिवारों से सीधे ली। अधिकारियों को क्षति का जल्द आकलन करने को कहा।
प्रभावित मकानों और घरेलू सामान का सर्वे प्राथमिकता से होगा। पात्र परिवारों को आरबीसी 6-4 के तहत सहायता मिलेगी। प्रशासन को इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
300 परिवारों को 10 हजार रुपये की अतिरिक्त मदद
सुकमा बाढ़ से प्रभावित करीब 300 परिवारों को अतिरिक्त सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रत्येक परिवार को 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। यह राशि आरबीसी 6-4 की सहायता से अलग होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई पात्र परिवार मदद से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सहायता वितरण में देरी नहीं करने के निर्देश दिए। इससे प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा मिलेगा।
कोंटा क्षेत्र में भी राहत व्यवस्था मजबूत
मुख्यमंत्री ने कोंटा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति देखी। लगातार बारिश से शबरी नदी का जलस्तर बढ़ गया था। इसके कारण कई गांवों में पानी भर गया था। कोंटा नगर पालिका के चार वार्ड भी प्रभावित हुए।
प्रभावित लोगों के लिए 19 राहत केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर भोजन और पेयजल की व्यवस्था है। लोगों के ठहरने की भी उचित व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष ध्यान
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें लगातार काम कर रही हैं। लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। जलजनित बीमारियों की रोकथाम के प्रयास भी जारी हैं।
पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन कराया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में स्वच्छता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जरूरतमंद परिवारों को सूखा राशन और गर्म कपड़े दिए जा रहे हैं।
राहत के बाद पुनर्वास पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों के साथ पुनर्वास तेज करने को कहा। उन्होंने प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन में लौटाने पर जोर दिया। अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ काम करने के निर्देश दिए।
सरकार का जोर पात्र परिवारों तक समय पर सहायता पहुंचाने पर है। क्षति आकलन से लेकर भुगतान तक प्रक्रिया तेज होगी। प्रशासन को हर प्रभावित परिवार की जरूरत समझने को कहा गया है।
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