25 जून को मनाए जाने वाले संविधान हत्या दिवस के अवसर पर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने देश में लागू किए गए आपातकाल को याद करते हुए एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला बताते हुए नागरिकों से इतिहास के इस दौर को याद रखने की अपील की।
इमरजेंसी को बताया लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कंगना रनौत ने कहा कि 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन समय था। उनके अनुसार, उस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई थी और कई लोकतांत्रिक संस्थाओं को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि संविधान हत्या दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के महत्व को समझने का अवसर भी है।
फिल्म ‘इमरजेंसी’ से साझा किया खास वीडियो
कंगना रनौत ने अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ की मेकिंग से जुड़ा एक बिहाइंड-द-सीन्स वीडियो भी साझा किया। वीडियो में फिल्म से जुड़े कई कलाकार उनके निर्देशन और काम की सराहना करते नजर आए।
अभिनेत्री ने बताया कि इस फिल्म पर काम करना उनके लिए एक अनूठा अनुभव रहा। संविधान हत्या दिवस के मौके पर उन्होंने इस फिल्म को देश के राजनीतिक इतिहास को समझने का एक माध्यम भी बताया।
लोकतंत्र की रक्षा करने वालों को दी श्रद्धांजलि
अपने संदेश में कंगना ने उन लोगों को याद किया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि देश का लोकतांत्रिक ढांचा नागरिकों की जागरूकता और संस्थाओं की मजबूती पर आधारित है।
उनके अनुसार, संविधान हत्या दिवस उन लोगों के योगदान को याद करने का दिन है जिन्होंने चुनौतीपूर्ण समय में भी लोकतंत्र का साथ नहीं छोड़ा।
बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला फिल्म का जादू
हालांकि कंगना रनौत की फिल्म ‘इमरजेंसी’ को लेकर काफी चर्चा रही, लेकिन रिलीज के बाद यह बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। फिल्म में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका निभाई थी।
फिर भी संविधान हत्या दिवस के अवसर पर फिल्म एक बार फिर चर्चा में आ गई है और सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो वायरल हो रहे हैं।
राजनीति और सिनेमा दोनों में सक्रिय हैं कंगना
कंगना रनौत इन दिनों अभिनय के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर उनकी प्रतिक्रियाएं अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संविधान हत्या दिवस पर उनका यह संदेश राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
निष्कर्ष
कंगना रनौत ने संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आपातकाल के दौर को याद करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया। उनका मानना है कि इतिहास के ऐसे अध्यायों को याद रखना जरूरी है ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाएं और अधिक मजबूत बन सकें।
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