संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। जैसे-ही उच्च सदन की कार्यवाही प्रारंभ हुई, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन पहली बार सभापति के रूप में राज्यसभा का संचालन करते दिखाई दिए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राधाकृष्णन की सराहना करते हुए कहा कि वे एक साधारण किसान परिवार से हैं और समाज सेवा को समर्पित जीवन उनकी पहचान है, जो सभी सांसदों के लिए प्रेरणा हैं।
पीएम मोदी ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि सदन में नारेबाजी नहीं, नीति और राष्ट्र निर्माण पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि ड्रामा के लिए कई मंच हैं, लेकिन संसद वह स्थान है जहां समाधान और डिलीवरी होनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि नए और युवा सांसदों को अपनी बात कहने का मौका नहीं मिल पा रहा है, इसलिए सभी दलों को सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए ताकि लोकतंत्र मजबूत हो सके।
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि शीतकालीन सत्र में “वोट की हेरा-फेरी” सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा और सरकार को इस पर जवाब देना होगा। वहीं पीएम मोदी ने सदन में चुनावी गुस्सा निकालने की राजनीति समाप्त करने की बात कही और सांसदों से राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की।