पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा पर फिर तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर अचानक बढ़ गया है। पाकिस्तान सेना ने आरोप लगाया है कि अफगान तालिबान सीमा पर फायरिंग कर आतंकियों और तस्करों को पाकिस्तान में प्रवेश कराने में मदद कर रहा है। पाक सेना के जन–संपर्क विभाग ISPR के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह गंभीर दावा किया, जिससे दोनों देशों के संबंधों में नया विवाद खड़ा हो गया है।

पाकिस्तान के अनुसार सीमा पर तैनात अफगान चौकियों की ओर से पाक पोस्टों पर लगातार फायरिंग की जा रही है। सेना का कहना है कि यह फायरिंग आकस्मिक नहीं बल्कि पूरी तरह समन्वित कार्रवाई होती है। जैसे ही सीमा पर गोलीबारी होती है, उसी समय तय बयानुसार आतंकियों और तस्करों को खाली हिस्सों से पाकिस्तान की ओर धकेला जाता है। जनरल चौधरी के मुताबिक कई घटनाओं में पोस्टों पर हमले के तुरंत बाद नीचे से तस्करों के वाहनों को गुजारा गया, जो योजनाबद्ध साजिश की ओर इशारा करता है।

सीमा प्रबंधन में चुनौतियाँ

पाकिस्तान–अफगान सीमा लगभग 2,500 किलोमीटर लंबी ड्यूरंड लाइन पर फैली है। पाकिस्तान के अनुसार 15 से 25 किलोमीटर की दूरी पर सैन्य चौकियाँ स्थापित हैं, लेकिन इतनी लंबी सीमा को पूरी तरह सील करना संभव नहीं। सेना का कहना है कि अवैध घुसपैठ को 100% रोकना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है, जैसा कि अमेरिका भी मेक्सिको सीमा पर नहीं कर पाया।

आतंकवाद विरोधी अभियानों के आंकड़े

ISPR के अनुसार पाकिस्तान में खुफिया आधारित अभियानों (IBOs) में पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
📌 4 नवंबर से अब तक 4,910 IBO अभियान चलाए गए — यानी प्रतिदिन औसतन 233 अभियान।
📌 जनवरी से लेकर अब तक 67,023 अभियानों में 206 आतंकियों को मार गिराया गया।
📌 इनमें से 53,000 से अधिक अभियान बलूचिस्तान और 12,800 से अधिक अभियान खैबर पख्तूनख्वा में हुए हैं।

इसके साथ पाकिस्तान ने दोहराया कि आतंकियों की बढ़ती गतिविधियों के पीछे अफगान तालिबान द्वारा तहरीक–ए–तालिबान पाकिस्तान (TTP) को सुरक्षित पनाह एवं संरक्षण देना एक प्रमुख कारण है।

संघर्षविराम पर सवाल

दोनों देशों के बीच हाल ही में संघर्षविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि यह तभी प्रभावी होता जब अफगान तालिबान सीमा पर हमले रोकता — जो अभी तक नहीं हुआ। परिणामस्वरूप दोनों देशों के रिश्ते फिर से टकराव की स्थिति में पहुँच गए हैं।

विश्लेषकों के अनुसार यदि राजनयिक स्तर पर बातचीत नहीं बढ़ी तो पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा क्षेत्र का तनाव भविष्य में बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है, जो पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *