मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 17 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित विभिन्न गरबा और नवरात्रि महोत्सवों में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री कालीबाड़ी स्थित मां काली मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने माता के दर्शन और पूजन किए। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इसके बाद वे कई सामाजिक संस्थाओं के नवरात्रि आयोजनों में शामिल हुए। इनमें पाटीदार समाज के गरबा समारोह और अमलीडीह का ढोलिडा रास गरबा-2026 शामिल रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि केवल धार्मिक उत्सव नहीं है। यह नारी शक्ति के सम्मान और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
गरबा महोत्सव से मजबूत होती है सामाजिक एकता
मुख्यमंत्री साय ने गरबा को आस्था और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संगम बताया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा गुजरात से शुरू होकर देशभर में लोकप्रिय हुई है।
गरबा जैसे आयोजन विभिन्न समाजों को एक साथ जोड़ते हैं। इससे आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने महिलाओं और बेटियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी पर भी प्रसन्नता जताई।
साय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। इसलिए महिलाओं का सम्मान और उनकी सुरक्षा समाज की साझा जिम्मेदारी है।
महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल
राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। इनमें महतारी वंदन योजना प्रमुख है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसके तहत लगभग 68 लाख महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह सहायता महिलाओं को अपनी जरूरतों पर निर्णय लेने में मदद करती है। महिलाएं इस राशि का उपयोग घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और बचत में कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि उनकी मेहनत, उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।
स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आजीविका के विभिन्न साधनों से परिवार की आय बढ़ा रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े प्रमुख बिंदु:
- लगभग 68 लाख महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता।
- प्रदेश में 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बनीं।
- महिलाओं को आजीविका और उद्यमिता के अवसर देने पर जोर।
- परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में प्रयास।
छत्तीसगढ़ में शक्ति आराधना की समृद्ध परंपरा
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ को माता कौशल्या की पावन धरती बताया। उन्होंने मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी के धार्मिक महत्व का उल्लेख किया।
नवरात्रि के दौरान इन शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गांवों और शहरों में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। पूरा प्रदेश भक्ति और उत्साह के वातावरण में नजर आता है।
साय ने कहा कि धार्मिक परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ती हैं। इन धरोहरों का संरक्षण समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने के लिए भी काम कर रही है।
धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं का विकास और उन्हें पर्यटन से जोड़ना भी प्रयासों का हिस्सा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की पहचान और भावी पीढ़ियों की प्रेरणा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में इन विषयों पर भी जोर दिया:
- धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर बेहतर सुविधाएं।
- सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा।
- महिलाओं की सम्मानजनक भागीदारी और आत्मनिर्भरता।
- छत्तीसगढ़ की परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन।
मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा से सभी प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास की कामना भी की।
कार्यक्रमों में विधायक पुरंदर मिश्रा, देवजी भाई पटेल, जयंती पटेल और जगदीश पटेल सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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