संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में बुधवार को राजनीतिक माहौल गर्मा गया, जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सदन में अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और कई सदस्य तख्तियां लेकर वेल में पहुंच गए। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़ा ऐतराज जताते हुए विपक्ष को संसदीय मर्यादा का पाठ पढ़ाया।
स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने हंगामे के बीच वरिष्ठ विपक्षी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उसका तरीका भी मर्यादित होना चाहिए।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बढ़ा तनाव
दरअसल, बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस चल रही है। एक ओर जहां विपक्ष चीन सीमा विवाद जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी विषय पर एक दिन पहले पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और बुधवार को वे लोकसभा में इस पर चर्चा कर रहे थे।
हंगामे पर स्पीकर की सख्त टिप्पणी
पीयूष गोयल के भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों ने टेबल पीटकर विरोध जताया और राहुल गांधी को बोलने देने की मांग करते हुए नारेबाजी की। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदन में तख्तियां लाना और नारे लगाना मर्यादा का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि शासन को इस तरह दबाव में नहीं झुकाया जा सकता।
ओम बिरला ने विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि विरोध शब्दों, तथ्यों और तर्कपूर्ण दलीलों से होता है, न कि हंगामे या पोस्टर दिखाने से। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लगातार सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई, तो इसका असर जनता के लोकतंत्र पर विश्वास पर पड़ेगा।
स्पीकर के इस सख्त रुख के बाद सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए प्रभावित रही, लेकिन यह घटनाक्रम एक बार फिर संसदीय मर्यादा और विपक्ष की भूमिका को लेकर बहस का विषय बन गया है।