रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर : एक परिचय पुस्तक का विमोचन किया। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा ने यह अध्ययन तैयार किया है। पुस्तक में जशपुर के इतिहास, प्रशासन और विकास यात्रा को समेटा गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रकाशन को जिले की पहचान सामने लाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि जशपुर प्रकृति, संस्कृति और जनजातीय परंपराओं से समृद्ध क्षेत्र है। यहां विकास की भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
जशपुर : एक परिचय में जिले की विकास यात्रा
पुस्तक में आजादी के बाद जशपुर में हुए प्रशासनिक बदलावों का उल्लेख है। इसमें वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यप्रणाली का भी अध्ययन किया गया है। सामाजिक और आर्थिक बदलावों को भी इसमें शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी क्षेत्र को समझने के लिए उसका समग्र अध्ययन जरूरी है। इसमें इतिहास, समाज, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधन और प्रशासन सभी पहलू शामिल होने चाहिए। यह पुस्तक इसी दृष्टिकोण से उपयोगी दस्तावेज है।
जशपुर : एक परिचय में प्रकृति और संस्कृति पर जोर
जशपुर की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताएं इसे अलग पहचान देती हैं। पहाड़, घाटियां, नदियां, जलप्रपात और घने वन इसकी प्राकृतिक संपदा हैं। वहीं, जनजातीय समुदायों की परंपराएं इसकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर की विकास योजनाओं में स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। प्रकृति संरक्षण के साथ विकास का संतुलन भी जरूरी है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने जशपुर को प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। जिले के वन, जलप्रपात और सुरम्य घाटियां पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं। जनजातीय संस्कृति और स्थानीय खान-पान भी पर्यटन को नई पहचान दे सकते हैं।
उन्होंने कृषि, वनोपज और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही। महिला और युवा उद्यमिता से रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा सकते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
प्रशासनिक अध्ययन से मिलेगा भविष्य की योजनाओं को आधार
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने जिला स्तर के अध्ययन के तहत जशपुर का चयन किया। इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था और विकास यात्रा का दस्तावेजीकरण करना है।
अध्ययन में वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का आकलन किया गया है। साथ ही, बेहतर प्रशासन के लिए संभावित दिशाओं की पहचान की गई है।
पुस्तक को पारंपरिक जिला गजेटियर के बजाय समग्र दस्तावेज के रूप में तैयार किया गया है। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों से मिली जानकारी का उपयोग किया गया है। जनगणना और सरकारी प्रकाशनों से भी आवश्यक सामग्री ली गई है।
मुख्य बातें:
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुस्तक का विमोचन किया।
- प्रकाशन में जशपुर की प्रशासनिक यात्रा दर्ज है।
- जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक संपदा पर भी जानकारी दी गई है।
- जिले की पर्यटन और विकास संभावनाओं को सामने रखा गया है।
- अध्ययन में विभिन्न सरकारी विभागों की जानकारी शामिल है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएं:
- आजादी के बाद प्रशासनिक बदलावों का अध्ययन।
- सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का विवरण।
- प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख।
- वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था का आकलन।
- भविष्य के विकास के लिए संभावित दिशाओं पर चर्चा।
शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी संदर्भ
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जशपुर : एक परिचय प्रशासकों और नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी होगी। शोधार्थियों और विद्यार्थियों को भी इससे जिले को समझने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन शासन और नागरिकों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है। योजनाओं के क्रियान्वयन में इसकी केंद्रीय भूमिका होती है। इसलिए प्रशासनिक अनुभवों का दस्तावेजीकरण अन्य क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
पुस्तक में जशपुर की भविष्य की विकास संभावनाओं पर भी ध्यान दिया गया है। इससे आगे होने वाले शोध और अध्ययन को आधार मिलने की उम्मीद है।
जशपुर की पहचान को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर की विशेषताओं को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना जरूरी है। इससे जिले की पहचान देश और दुनिया तक पहुंच सकती है। साथ ही, विकास की नई संभावनाओं पर भी चर्चा आगे बढ़ेगी।
उन्होंने प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह अध्ययन जशपुर के अतीत और वर्तमान को समझने में मदद करेगा। साथ ही, जिले के उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय करने में भी उपयोगी साबित होगा।
कुल मिलाकर, जशपुर : एक परिचय पुस्तक जिले के प्रशासन, संस्कृति, प्रकृति और विकास को एक साथ प्रस्तुत करती है। यह प्रकाशन जशपुर की विशिष्ट पहचान को समझने का उपयोगी माध्यम बन सकता है।
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