सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत नई संचालन नीति पर समीक्षा की। बैठक में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने हर घर तक नियमित शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य दोहराया।
मुख्य बातें
- पंचायतों को योजनाओं की जिम्मेदारी मिलेगी।
- ग्राम जल समितियां रखरखाव करेंगी।
- सोशल ऑडिट अनिवार्य होगा।
- ग्राम सभाओं में पेयजल पर चर्चा होगी।
- जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी होगी।
- वित्तीय प्रबंधन पर भी जोर रहेगा।
जल जीवन के लिए पंचायतों की भूमिका बढ़ेगी
बैठक में तय किया गया कि नल-जल योजनाएं ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएंगी। इससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही बढ़ेगी।
इसके अलावा ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां संचालन संभालेंगी। इससे लोगों की भागीदारी भी मजबूत होगी।
जल जीवन में सोशल ऑडिट रहेगा जरूरी
जल जीवन मिशन के तहत सभी योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण कराया जाएगा। इससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।
साथ ही प्रत्येक ग्राम सभा में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा होगी। इससे स्थानीय समस्याओं का समाधान तेज होगा।
वाटर मीटर और वित्तीय व्यवस्था पर चर्चा
बैठक में जल शुल्क और रखरखाव बजट पर भी विचार हुआ। भविष्य में वाटर मीटर लगाने का प्रस्ताव भी सामने आया।
हालांकि अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा। वहीं जल संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों ने गुणवत्ता जांच और मॉनिटरिंग व्यवस्था की जानकारी दी। इसके अलावा सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
एक नजर में
- हर घर तक शुद्ध जल पहुंचाने का लक्ष्य।
- पंचायतों को संचालन की जिम्मेदारी।
- सोशल ऑडिट से बढ़ेगी पारदर्शिता।
- ग्राम सभाओं में होगी नियमित समीक्षा।
- भविष्य में वाटर मीटर लगाने पर विचार।
- जल गुणवत्ता की होगी लगातार निगरानी।
आगे की तैयारी
जल जीवन मिशन 2.0 के लिए विभाग जल्द विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगा। इसलिए योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
नई व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सेवाएं मजबूत होंगी। कुल मिलाकर लोगों को बेहतर और नियमित सुविधा मिलने की उम्मीद है।
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