छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में मध्यान्ह भोजन में लापरवाही का शर्मनाक मामला सामने आया है। लच्छनपुर गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों को कुत्ते का जूठा खाना परोसा गया। घटना 29 जुलाई की है, जब खाना खुले में रखा गया और आवारा कुत्ते उसे चाट गए। इसके बावजूद, बच्चों को वही भोजन खिलाया गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की खंडपीठ ने इसे जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की।
कोर्ट ने राज्य के शिक्षा सचिव से चार बिंदुओं पर शपथ-पत्र सहित जवाब मांगा है:
- क्या सभी 84 बच्चों को रेबीज वैक्सीन लगी?
- क्या दोषियों पर कार्रवाई हुई?
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम कैसे होगी?
- बच्चों को क्या मुआवजा दिया गया?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि अमानवीयता है।
रेबीज जैसी बीमारी का कोई इलाज नहीं होता, इसलिए यह गंभीर स्वास्थ्य संकट है।
कोर्ट ने पूछा कि शिक्षक और महिला समूह पर क्या कार्रवाई हुई?
यह मामला सिर्फ प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन से खिलवाड़ है, जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।