छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में रेलवे सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। भिलाई-3 स्थित रेलवे यार्ड से करीब 40 लाख रुपये मूल्य की सेफ्टी फेंसिंग सामग्री चोरी हो गई, लेकिन घटना के दो महीने बाद भी अब तक FIR दर्ज नहीं की जा सकी है।
यह चोरी नवंबर महीने में हुई, जब अज्ञात चोरों ने लोहे और एल्यूमीनियम से बनी भारी मात्रा में सामग्री यार्ड से पार कर दी। हैरानी की बात यह रही कि घटना के समय CCTV कैमरे बंद पाए गए, जिससे किसी भी तरह का फुटेज उपलब्ध नहीं हो सका और चोरों की पहचान मुश्किल हो गई।
क्यों लगाई जा रही थी सेफ्टी फेंसिंग
दरअसल, दुर्ग से बिलासपुर के बीच करीब 272 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों को 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित चलाने के लिए सेफ्टी फेंसिंग का काम किया जाना है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए रेलवे ने एक निजी कंपनी को ठेका दिया था।
चोरी हुई सामग्री को भिलाई-3 रेलवे यार्ड में सुरक्षित रखे जाने का दावा किया गया था, लेकिन सुरक्षा में भारी चूक के चलते चोर आसानी से करोड़ों की योजना को नुकसान पहुंचाने में सफल हो गए।
FIR को लेकर विभागों में टालमटोल
ठेका कंपनी के महाप्रबंधक विमल पुरोहित के अनुसार, चोरी की सूचना देने के बावजूद अब तक न तो आरपीएफ, न जीआरपी, और न ही जिला पुलिस ने मामला दर्ज किया है। तीनों विभाग एक-दूसरे पर क्षेत्राधिकार का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि FIR दर्ज न होने के कारण न तो जांच शुरू हो सकी है और न ही चोरी गए सामान की तलाश। इसका सीधा असर सेफ्टी फेंसिंग के कार्य पर पड़ा है, जिससे परियोजना की रफ्तार धीमी हो गई है।
बढ़ते अपराध और प्रशासनिक लापरवाही
स्थानीय स्तर पर इस तरह की लापरवाही से चोरों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो रेलवे जैसी संवेदनशील व्यवस्था की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।