प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के लाल किले भाषण के बाद दिमागी नक्सल मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में नक्सली विचारधारा को लेकर देशवासियों को आगाह किया था। उन्होंने इस दौरान किसी नेता या दल का नाम नहीं लिया था।
इसके बाद कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह संबोधित किए जाने पर गर्व है। चिदंबरम के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में नक्सली विचारधारा का उल्लेख किया।
- पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी।
- भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को घेरा।
- भाजपा ने कांग्रेस के कार्यकाल से जुड़े नक्सल आंकड़ों का जिक्र किया।
- मनमोहन सिंह के पुराने बयान को भी राजनीतिक बहस में शामिल किया गया।
चिदंबरम के बयान पर भाजपा का पलटवार
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पी. चिदंबरम के बयान को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया था। इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
त्रिवेदी ने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में नक्सलवाद गंभीर चुनौती बना हुआ था। उन्होंने चिदंबरम के गृह मंत्री रहने के दौरान नक्सल प्रभावित जिलों के आंकड़े भी बताए।
भाजपा के अनुसार, उस समय करीब 180 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। पार्टी ने यह भी दावा किया कि नक्सली हिंसा के कारण हजारों निर्दोष लोगों की मौत हुई।
दिमागी नक्सल टिप्पणी पर क्यों बढ़ा विवाद?
इस राजनीतिक विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन से हुई। प्रधानमंत्री ने नक्सली विचारधारा को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि, उन्होंने अपने भाषण में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया था।
इसके बाद कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने मुद्दे को राजनीतिक बहस में बदल दिया। भाजपा ने अब कांग्रेस के पुराने शासनकाल और नक्सलवाद के आंकड़ों को चर्चा का हिस्सा बनाया है।
राहुल गांधी पर भी भाजपा का निशाना
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से नक्सलवाद के पुराने दौर को देखने की अपील की।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था। उन्होंने दावा किया कि उस समय नक्सली गतिविधियों का प्रभाव काफी व्यापक था।
वहीं, कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री की टिप्पणी और भाजपा के आरोपों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इससे दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
मनमोहन सिंह के पुराने बयान का जिक्र
भाजपा ने अपनी दलील के समर्थन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुराने बयान का भी उल्लेख किया। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 13 अप्रैल 2006 को मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में बताया था।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि नक्सलवाद के मुद्दे पर मनमोहन सिंह की चिंता सही थी या पी. चिदंबरम का मौजूदा रुख।
नक्सलवाद पर राजनीतिक बहस फिर तेज
दिमागी नक्सल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और भाजपा के बीच व्यापक राजनीतिक बहस बन चुका है। भाजपा पुराने आंकड़ों और कांग्रेस नेताओं के बयानों को आधार बना रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस प्रधानमंत्री की भाषा और राजनीतिक आरोपों पर सवाल उठा रही है। इसलिए यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक चर्चा में बना रह सकता है।