डाइट सोडा बनाम पानी: SWITCH ट्रायल कैसे हुआ, नतीजे क्या कहते हैं

डाइट सोडा बनाम पानी: दो गिलास, एक में पानी और एक में बुलबुले वाली डार्क ड्रिंक, बीच में बराबर का निशान

स्वीटनर वाली ड्रिंक पर बहस पुरानी है. कुछ लोग इसे चीनी का बेहतर विकल्प मानते हैं, तो कुछ को डर है कि यह भूख और वज़न बढ़ाती है. इसी सवाल पर ब्रिटेन का SWITCH ट्रायल डाइट सोडा बनाम पानी की सीधी तुलना लेकर आया है. इसके दो साल के नतीजे British Journal of Nutrition में प्रकाशित हुए हैं.

डाइट सोडा बनाम पानी: ट्रायल का निष्कर्ष क्या है

दो साल के अंत में दोनों समूहों ने शुरुआती वज़न से कम वज़न बनाए रखा. स्वीटनर वाली ड्रिंक लेने वालों का औसत वज़न 4.8 किलो और पानी पीने वालों का 3.7 किलो घटा. हालांकि दोनों के बीच का अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं निकला, इसलिए ट्रायल ने दोनों विकल्पों को बराबर माना.

SWITCH ट्रायल का ढांचा

  • प्रकार: ओपन-लेबल, रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ‘इक्विवेलेंस’ ट्रायल.
  • प्रतिभागी: 27 से 35 BMI वाले 493 वयस्क, 246 पानी और 247 स्वीटनर ड्रिंक समूह में.
  • अवधि: 12 हफ्ते सक्रिय वज़न घटाना, 40 हफ्ते सहायता के साथ मेंटेनेंस, फिर 52 हफ्ते बिना सहायता.
  • टीम: यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल, यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स और एज हिल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता.
  • फंडिंग: अमेरिकन बेवरेज एसोसिएशन.

रैंडमाइज़्ड ट्रायल का मतलब क्या है

दरअसल पोषण पर ज़्यादातर पुरानी रिसर्च ‘ऑब्ज़र्वेशनल’ रही है. यानी लोगों की आदतें देखी जाती हैं और फिर बीमारियों से उनका रिश्ता खोजा जाता है. इसमें दिक्कत यह है कि कारण और नतीजा उलझ सकते हैं.

उदाहरण के लिए, StudyFinds की रिपोर्ट के मुताबिक लेखकों ने ध्यान दिलाया है कि वज़न बढ़ने पर लोग खुद डाइट ड्रिंक की तरफ जा सकते हैं. ऐसे में डाइट ड्रिंक और मोटापे का जुड़ाव दिखेगा, भले ड्रिंक वजह न हो.

वहीं रैंडमाइज़्ड ट्रायल में लोगों को लॉटरी जैसे तरीके से समूहों में बांटा जाता है. नतीजतन दोनों समूह शुरुआत में लगभग एक जैसे रहते हैं. इसलिए अंत में दिखने वाला फर्क ज़्यादा भरोसे से जांची गई चीज़ से जोड़ा जा सकता है.

‘इक्विवेलेंस’ और ‘सांख्यिकीय महत्व’ को समझें

सबसे पहले यह समझें कि डाइट सोडा बनाम पानी की इस तुलना का मकसद क्या था. ट्रायल यह जानना चाहता था कि स्वीटनर ड्रिंक पानी जितनी असरदार है या नहीं. इसीलिए इसे इक्विवेलेंस ट्रायल यानी बराबरी परखने वाला ट्रायल कहते हैं.

अब सवाल उठता है कि 1.1 किलो का अंतर क्यों नहीं गिना गया. दरअसल सांख्यिकी में देखा जाता है कि कोई अंतर संयोग से भी आ सकता है या नहीं. लेकिन यहां अंतर इतना पक्का नहीं था कि उसे संयोग से अलग माना जाए. कुछ अमेरिकी रिपोर्टों में यही आंकड़े 10.6 और 8.2 पाउंड लिखे गए हैं, जो किलो वाले आंकड़ों के बराबर हैं.

डाइट सोडा बनाम पानी: वज़न के अलावा क्या दिखा

यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के मुताबिक दोनों समूहों में कमर और हिप का घेरा घटा और मेटाबॉलिक संकेतक सुधरे. साथ ही ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल में समूहों के बीच कोई चिकित्सकीय रूप से अहम फर्क नहीं मिला. इसके अलावा दोनों समूहों ने चीनी कम खाई.

StudyFinds के अनुसार दोनों समूहों का सबसे कम वज़न पहले साल के भीतर दर्ज हुआ, फिर कुछ वज़न लौट आया. यानी बिना सहायता वाले दौर में वज़न बनाए रखना दोनों के लिए चुनौती रहा.

किन कमज़ोरियों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

सबसे पहले फंडिंग. ट्रायल को पेय उद्योग की संस्था अमेरिकन बेवरेज एसोसिएशन ने फंड किया. पेपर के मुताबिक फंड देने वाले की डिज़ाइन, विश्लेषण या व्याख्या में कोई भूमिका नहीं थी. फिर भी उद्योग-समर्थित नतीजों की स्वतंत्र पुष्टि अहम मानी जाती है.

दूसरी कमज़ोरी ड्रॉपआउट है. आखिरी दौर सिर्फ 220 लोगों ने पूरा किया, यानी करीब 45%. बाकी करीब 55% बीच में हट गए. इतने ड्रॉपआउट से बचे हुए लोगों की तस्वीर पूरी आबादी जैसी नहीं रह जाती. इसलिए नतीजों को अंतिम फैसला नहीं, एक अहम संकेत की तरह पढ़ना बेहतर है.

तीसरी, ट्रायल ओपन-लेबल था. यानी प्रतिभागी जानते थे कि उन्हें पानी मिला है या स्वीटनर ड्रिंक. इसके अलावा सभी प्रतिभागी ब्रिटेन से थे और सिर्फ वयस्क थे.

WHO की गाइडलाइन से टकराव कैसे समझें

WHO ने मई 2023 की गाइडलाइन में कहा था कि शरीर का वज़न नियंत्रित करने या गैर-संचारी बीमारियों का जोखिम घटाने के लिए नॉन-शुगर स्वीटनर का इस्तेमाल न किया जाए. यह सशर्त सिफारिश थी और पहले से डायबिटीज़ वाले लोगों पर लागू नहीं होती.

इसलिए डाइट सोडा बनाम पानी पर एक ट्रायल से यह आधिकारिक सलाह नहीं पलटती. ध्यान रहे कि WHO का संदेश मीठे स्वाद पर निर्भरता घटाने का भी है. इसके बजाय संगठन फल जैसी प्राकृतिक मिठास और बिना मीठे वाले खाने-पीने की सलाह देता है. आखिर में, रोज़ की प्यास के लिए सादा पानी ही बुनियादी सलाह बनी रहती है.

SWITCH ट्रायल पर पाठकों के सवाल

क्या इस ट्रायल से साबित होता है कि डाइट ड्रिंक सुरक्षित है?

नहीं. दरअसल ट्रायल ने मुख्य रूप से वज़न देखा. लंबी अवधि की हर तरह की सुरक्षा इसका सवाल नहीं था.

क्या चीनी वाली ड्रिंक से तुलना हुई थी?

नहीं. तुलना स्वीटनर ड्रिंक और पानी के बीच थी. इसलिए चीनी वाली ड्रिंक के बारे में यह ट्रायल सीधे कुछ नहीं कहता.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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