छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति के प्रतीक और ‘नाचा’ लोककला के जनक माने जाने वाले Dau Dular Singh Mandaraji की जयंती पर मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी पारंपरिक लोकविधा को नई पहचान दिलाई और उसे जन-जन तक पहुंचाकर सामाजिक जागरूकता का प्रभावी माध्यम बनाया। उनके प्रयासों से यह कला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त मंच बनी।
लोक कलाकारों को दिया नया मंच
मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने गांव-गांव के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने इस कला को गरिमा और पहचान दिलाकर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत किया।
संस्कृति संरक्षण में अहम योगदान
दाऊ मंदराजी का जीवन लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अपनी साधना और समर्पण से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला को जीवंत बनाए रखा, जो आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही है।
सम्मान के जरिए जीवित है विरासत
राज्य सरकार द्वारा लोककला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है। यह सम्मान उनके अमूल्य योगदान को याद करने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने का एक माध्यम है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी युवाओं को अपनी संस्कृति से जुड़ने और लोककला को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उनकी विरासत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बनी रहेगी।