आदिवासी विकास को नई रफ्तार, शिक्षा से रोजगार तक दिखा असर

आदिवासी विकास योजना

छत्तीसगढ़ में आदिवासी विकास योजनाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सरकार शिक्षा, कौशल और अधोसंरचना पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे जनजातीय क्षेत्रों में कई सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं।

राज्य में 43 अनुसूचित जनजातियां और उनके उपसमूह रहते हैं। जनजातीय आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का 30.62 प्रतिशत है। वहीं अनुसूचित क्षेत्र 60 प्रतिशत से अधिक है।

मुख्य बातें

  • 43 अनुसूचित जनजातियां प्रदेश में निवास करती हैं।
  • 84 हजार से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिली।
  • 75 एकलव्य विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।
  • 17 क्रीड़ा परिसरों में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण मिल रहा है।
  • वन अधिकार योजनाओं से लाखों लोग लाभान्वित हुए।
  • वर्ष 2026-27 के लिए बजट में बढ़ोतरी की गई।

आदिवासी विकास के लिए शिक्षा पर विशेष जोर

सरकार छात्रवृत्ति और छात्रावास सुविधाएं बढ़ा रही है। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिल रही है।

84 हजार 702 विद्यार्थियों को 94.57 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई। राज्य में 2817 आश्रम और छात्रावास संचालित हैं।

इनमें 1.62 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।

छात्रवृत्ति और खेल में बढ़ी भागीदारी

आदिवासी विकास कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को हर महीने सहायता मिल रही है। भोजन सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

राज्य के 75 एकलव्य विद्यालयों में 27 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। वर्ष 2025-26 में खिलाड़ियों ने 1022 स्वर्ण पदक जीते।

इसके अलावा 156 रजत और 176 कांस्य पदक भी हासिल किए।

वन अधिकार और रोजगार योजनाओं को मिला विस्तार

व्यक्तिगत वन अधिकार के तहत 4.28 लाख दावाकर्ताओं को लाभ मिला। वहीं सामुदायिक वन अधिकार से भी हजारों परिवार जुड़े।

पीएम-जनमन अभियान 18 जिलों में संचालित हो रहा है। इसके अलावा धरती आबा अभियान से 32 जिलों के 6691 गांव लाभान्वित हुए।

युवा करियर योजना से 164 अभ्यर्थियों को सफलता मिली।

बजट में हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी

आदिवासी विकास योजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 में 2136 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।

आदिवासी उपयोजना के लिए 42,165 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पिछले वर्ष से अधिक है।

इसलिए विकास योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में शिक्षा, खेल और रोजगार पर लगातार काम हो रहा है।

इससे जनजातीय क्षेत्रों का विकास मजबूत हुआ है।

हालांकि योजनाओं की सफलता जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि काम समय पर पूरे हुए, तो लोगों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

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