रायगढ़ में संगीत और नृत्य की गौरवशाली परंपरा फिर जीवंत हुई। चक्रधर समारोह 2026 का भव्य शुभारंभ सोमवार को हुआ। राज्यपाल रमेन डेका ने समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने महाराजा चक्रधर सिंह की तैलचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित किया।
समारोह का आयोजन रामलीला मैदान में किया जा रहा है। देश और प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकार इसमें प्रस्तुति देंगे। स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम 14 से 23 सितंबर तक आयोजित होगा।
कला विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ रहा आयोजन
राज्यपाल रमेन डेका ने समारोह को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल कला प्रस्तुतियों का मंच नहीं है। यह महाराजा चक्रधर सिंह की साधना को याद करता है। साथ ही, उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाता है।
महाराजा चक्रधर सिंह ने कला को विशेष महत्व दिया था। उन्होंने कलाकारों को संरक्षण और प्रोत्साहन दिया। संगीत, नृत्य और साहित्य को जनजीवन से जोड़ा। उनके प्रयासों से रायगढ़ घराने को अलग पहचान मिली।
चक्रधर समारोह 2026 में दिखेगी सांस्कृतिक विविधता
चक्रधर समारोह 2026 में कई विधाओं की प्रस्तुतियां होंगी। इनमें गायन, वादन, नृत्य और लोककला शामिल हैं। देश के प्रतिष्ठित कलाकार भी मंच साझा करेंगे।
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने पंथी और राउत नाचा की विशेषता बताई। भरथरी, सुआ और करमा भी महत्वपूर्ण लोक विधाएं हैं। आदिवासी नृत्य और लोकगीत भी प्रदेश की पहचान हैं।
महाराजा चक्रधर सिंह की रचनाएं बनीं सांस्कृतिक धरोहर
महाराजा चक्रधर सिंह की कई रचनाएं आज भी महत्वपूर्ण हैं। इनमें ‘नर्तन सर्वस्व’ प्रमुख ग्रंथों में शामिल है। ‘तालतोय निधि’ और ‘राग रत्न मंजूषा’ भी उल्लेखनीय हैं।
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने ग्रंथों के प्रकाशन और अध्ययन की आवश्यकता बताई। उन्होंने इस विषय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखने की जानकारी दी।
उनके अनुसार इन ग्रंथों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। इससे नई पीढ़ी को महान कला परंपरा समझने में मदद मिलेगी।
समारोह में प्रमुख सांस्कृतिक आकर्षण
- देश-प्रदेश के कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।
- स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच मिलेगा।
- शास्त्रीय संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी।
- लोककला और पारंपरिक विधाएं भी शामिल रहेंगी।
उद्घाटन कार्यक्रम की खास झलकियां
- राज्यपाल रमेन डेका ने समारोह का उद्घाटन किया।
- कलाकारों को सम्मानित किया गया।
- गणेश वंदना से पहली शाम शुरू हुई।
- गायन और वादन ने दर्शकों का मन मोहा।
रायगढ़ घराने की पहचान को मिल रहा नया मंच
रायगढ़ भारतीय शास्त्रीय कलाओं की महत्वपूर्ण भूमि है। यहां कथक की विशिष्ट परंपरा विकसित हुई है। रायगढ़ घराने ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है।
राज्यपाल ने कहा कि कला निरंतर साधना से आगे बढ़ती है। इसी साधना ने रायगढ़ को कला का केंद्र बनाया। घुंघरुओं की झंकार और तबले की थाप इसकी पहचान हैं।
उन्होंने युवाओं से परंपरा और नवाचार जोड़ने की अपील की। इससे कला को आधुनिक समय में नई दिशा मिल सकती है।
विकास के साथ संस्कृति का संरक्षण भी जरूरी
राज्यपाल ने सांस्कृतिक विरासत बचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास के साथ संस्कृति को भी आगे बढ़ाना चाहिए।
रायगढ़ औद्योगिक विकास के लिए भी जाना जाता है। वहीं, इसकी कला पहचान भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकते हैं।
चक्रधर समारोह 2026 इसी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहा है। इससे कलाकारों और कला प्रेमियों को बेहतर मंच मिलता है। साथ ही नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है।
गणेश वंदना से शुरू हुई पहली शाम
समारोह की पहली शाम गणेश वंदना से शुरू हुई। स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने प्रस्तुति दी। इसके बाद गायन और वादन का कार्यक्रम हुआ।
हारमोनियम पर प्रियंका साहू ने संगत की। सुनीता तिवारी सहित कई कलाकारों ने गायन किया। पखावज, तबला, बांसुरी और वायलिन की प्रस्तुति हुई।
आनंददास महंत ने घुंघरू वादन से कार्यक्रम को आकर्षक बनाया। दर्शकों ने कलाकारों का तालियों से स्वागत किया।
चक्रधर समारोह 2026 से बढ़ेगा सांस्कृतिक संवाद
चक्रधर समारोह 2026 रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहा है। यह आयोजन कलाकारों और दर्शकों को एक मंच देता है। साथ ही पारंपरिक कला को नई पीढ़ी से जोड़ता है।
लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने भी आयोजन की सराहना की। उन्होंने इसे रायगढ़ की गौरवशाली पहचान का प्रतीक बताया।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने संस्कृति को समाज की आत्मा बताया। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार जताया।
आयोजन 23 सितंबर तक जारी रहेगा। इस दौरान विभिन्न कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इससे रायगढ़ में कला और संस्कृति का माहौल बना रहेगा।