जनगणना 2027 की तैयारी तेज, डेटा सुरक्षा पर बड़ा भरोसा
देश में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान जुटाया गया व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। यह जानकारी न तो RTI के तहत साझा की जाएगी, न अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल होगी और न ही किसी अन्य संस्था को दी जाएगी।
डिजिटल होगी जनगणना, दो चरणों में पूरा होगा सर्वे
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिससे प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का होगा, जो कई राज्यों में जल्द शुरू होने जा रहा है। जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी, जिसमें फील्डवर्क और डेटा संग्रह के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना, राज्यों की अहम भूमिका
यह जनगणना स्वतंत्रता के बाद देश की आठवीं जनगणना होगी। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जहां प्रशासनिक तंत्र को जमीनी स्तर तक सक्रिय किया जाएगा। पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी।
नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त सजा का प्रावधान
जनगणना से पहले अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। डेटा का दुरुपयोग, लापरवाही या नागरिकों से अनुचित सवाल पूछना अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में जनगणना अधिनियम 1948 के तहत 1,000 रुपये तक का जुर्माना और तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
जनगणना 2027 में बड़े बदलाव, लिव-इन रिलेशन को भी मान्यता
इस बार जनगणना में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं। पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को भी विवाहित श्रेणी में शामिल किया जाएगा, यदि वे अपने संबंध को स्थायी मानते हैं।
हाउस लिस्टिंग चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे और यह प्रक्रिया 45 दिनों तक चलेगी। यह चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच अलग-अलग राज्यों में पूरा किया जाएगा। वहीं, दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें व्यक्ति से जुड़ी विस्तृत जानकारी जैसे आयु, शिक्षा, पेशा, धर्म और अन्य विवरण जुटाए जाएंगे।
डिजिटल सिस्टम के जरिए लोग खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनने की उम्मीद है।