भारत-पाक तनाव में चीन की मध्यस्थता के दावे पर कांग्रेस का सवाल

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर चीन द्वारा मध्यस्थता किए जाने के दावे ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय बताया है। कांग्रेस का कहना है कि भारत की जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर सच्चाई क्या है और सरकार इस पर चुप क्यों है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विषय पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में व्यक्तिगत हस्तक्षेप का दावा कर चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने इन बयानों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अब चीन के विदेश मंत्री द्वारा इसी तरह का दावा किया जाना और भी चिंताजनक है।

जयराम रमेश ने यह भी याद दिलाया कि 4 जुलाई 2025 को सेना के उप प्रमुख राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत वास्तव में चीन की रणनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। ऐसे में चीन द्वारा भारत-पाक के बीच मध्यस्थता का दावा न केवल विरोधाभासी है, बल्कि जनता के भरोसे के खिलाफ भी है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चीन निर्णायक रूप से पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा है और ऐसे देश द्वारा मध्यस्थता का दावा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का उपहास उड़ाने जैसा प्रतीत होता है। पार्टी ने यह भी कहा कि 19 जून 2020 को चीन को लेकर दिए गए प्रधानमंत्री के बयान से भारत की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई है, जिसका असर आज व्यापार घाटे और आयात-निर्भरता के रूप में दिख रहा है।

कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अचानक रोकने में चीन की कोई भूमिका थी या नहीं। दूसरी ओर, भारत सरकार का आधिकारिक रुख लगातार स्पष्ट रहा है कि 7 से 10 मई के बीच उत्पन्न स्थिति भारत और पाकिस्तान के DGMO स्तर की सीधी बातचीत से सुलझी थी और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई आवश्यकता नहीं थी।

यह पूरा विवाद अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की सुरक्षा, विदेश नीति और सरकार की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है।

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