बस्तर दशहरा 2026: पाट जात्रा पूजा से आज होगी शुरुआत, जानें पूरा कार्यक्रम

बस्तर दशहरा 2026

बस्तर दशहरा 2026 का शुभारंभ 12 अगस्त से पाट जात्रा पूजा के साथ होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मनाया जाने वाला यह अनूठा पर्व 75 दिनों तक चलता है। मां दंतेश्वरी को समर्पित यह आयोजन अपनी जनजातीय परंपराओं, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के कारण देश-दुनिया में विशेष पहचान रखता है।

मुख्य बातें

  • 12 अगस्त से पाट जात्रा पूजा के साथ पर्व की शुरुआत।
  • 75 दिनों तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे।
  • मां दंतेश्वरी को समर्पित है पूरा आयोजन।
  • रथ निर्माण की पारंपरिक रस्म भी आज से शुरू होगी।
  • 27 अक्टूबर को मावली माता की विदाई के साथ समापन होगा।

बस्तर दशहरा 2026 की शुरुआत पाट जात्रा पूजा से

पाट जात्रा पूजा को बस्तर दशहरा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इस दिन मांझी-चालकी, पुजारी, पटेल, नाइक-पाइक, मेम्बर-मेम्बरीन और अन्य पारंपरिक सेवादार रथ निर्माण के लिए आवश्यक औजार बनाने की रस्म निभाते हैं।

बस्तर दशहरा समिति ने सभी ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं से इस पूजा में शामिल होने की अपील की है। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति और सामाजिक एकता का भी प्रतीक माना जाता है।

बस्तर दशहरा 2026 का पूरा कार्यक्रम

पाट जात्रा के बाद सितंबर और अक्टूबर में कई प्रमुख पूजा विधान आयोजित किए जाएंगे। 24 सितंबर को डेरी गड़ाई पूजा होगी। इसके बाद 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा और 11 अक्टूबर को कलश स्थापना का आयोजन किया जाएगा।

12 अक्टूबर को जोगी बिठाई की रस्म होगी। वहीं, 13 से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा और रथ परिक्रमा होगी। 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और निशा जात्रा का आयोजन होगा।

20 अक्टूबर को कुंवारी पूजा, जोगी उठाई और मावली परघाव संपन्न होंगे। 21 और 22 अक्टूबर को भीतर रैनी तथा बाहर रैनी की ऐतिहासिक रस्में निभाई जाएंगी। 23 अक्टूबर को काछन जात्रा और प्रसिद्ध मुरिया दरबार लगेगा। 24 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा के साथ ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई होगी। 27 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई के साथ पर्व का समापन होगा।

बस्तर दशहरा क्यों है सबसे अलग?

देश के अधिकांश हिस्सों में दशहरा भगवान श्रीराम की विजय से जुड़ा होता है। इसके विपरीत, बस्तर का दशहरा मां दंतेश्वरी की आराधना पर आधारित है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

यह पर्व जनजातीय समाज, पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय लोक संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। हर रस्म का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व माना जाता है।

एक नजर में

  • अवधि: 75 दिन
  • शुरुआत: 12 अगस्त, पाट जात्रा पूजा
  • प्रमुख देवी: मां दंतेश्वरी
  • विशेष आकर्षण: रथ निर्माण, रथ परिक्रमा और मुरिया दरबार
  • समापन: 27 अक्टूबर, मावली माता की विदाई

बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक

बस्तर दशहरा 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है। यह बस्तर की परंपरा, जनजातीय विरासत और सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत उत्सव है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने पहुंचते हैं। इस बार भी बस्तर दशहरा 2026 के दौरान पारंपरिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विशेष आकर्षण रहेगा।

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