छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में अनवर ढेबर को बड़ा झटका मिला क्योंकि हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।
वह ACB और EOW द्वारा की गई गिरफ्तारी को अवैध बता रहा था, लेकिन कोर्ट ने दलीलें नहीं मानी।
उसने याचिका में दावा किया कि उसकी गिरफ्तारी बिना कानूनी सूचना के की गई, जो संविधान का उल्लंघन है।
लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामला दो हजार करोड़ से अधिक का घोटाला है।
और यह घोटाला शराब दुकानों से डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर अवैध बिक्री के ज़रिए किया गया।
जिससे छत्तीसगढ़ सरकार को भारी राजस्व हानि हुई और यह गंभीर आपराधिक साजिश का हिस्सा है।
अनवर ढेबर ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया को अनुच्छेद 21 और 22 का उल्लंघन बताते हुए राहत की मांग की थी।
लेकिन ACB की ओर से कहा गया कि यह गिरफ्तारी नियमों के अनुसार की गई थी और सबूत मजबूत हैं।
ED की जांच रिपोर्ट के अनुसार अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी और अनवर ढेबर एक सिंडिकेट चला रहे थे।
इस सिंडिकेट ने फर्जी होलोग्राम से शराब बेचकर शासन को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया।
इस पर ACB ने FIR दर्ज की और अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया, जिसे उसने अदालत में चुनौती दी।
हालांकि, विशेष न्यायालय ने पहले भी पुलिस रिमांड आदेश दिए थे जिन्हें रद्द कराने की मांग की गई थी।
लेकिन हाईकोर्ट ने दो बार याचिका खारिज कर स्पष्ट कर दिया कि अपराध गंभीर और सुनियोजित है।
इसलिए अनवर की गिरफ्तारी न केवल सही है बल्कि आगे की जांच के लिए आवश्यक भी है।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट हो गया है कि न्यायपालिका अब इस आर्थिक अपराध को लेकर सख्त रुख अपना रही है।
और राज्य सरकार ने यह भी बताया कि घोटाले में शामिल हर व्यक्ति को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।
अब अगली सुनवाई में यह तय होगा कि इस शराब घोटाले में और कौन-कौन दोषी करार दिए जाएंगे।
क्योंकि राज्य सरकार को हुए राजस्व घाटे की भरपाई और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
भविष्य में इस मामले की गहराई से जांच और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की भी पूरी संभावना है।
इसलिए यह मामला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक बनता जा रहा है।