बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही सियासी गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में पटना में एक बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। होटल मौर्या में हुई यह बैठक केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सीट शेयरिंग समेत कई चुनावी मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
सीट शेयरिंग पर मंथन
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह और नीतीश कुमार की बातचीत का मुख्य एजेंडा सीटों का बंटवारा था। बिहार विधानसभा चुनाव में NDA गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने इस पर विस्तृत विचार किया और रणनीति का खाका तैयार किया।
अमित शाह का दो दिवसीय बिहार दौरा
अमित शाह दो दिनों के बिहार दौरे पर हैं। गुरुवार को उन्होंने सबसे पहले सीएम नीतीश से मुलाकात की। इसके बाद वे 20 जिलों के बीजेपी नेताओं के साथ अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में प्रत्याशी चयन, बूथ मैनेजमेंट और चुनावी कैंपेन से जुड़े बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। शाह का यह दौरा संगठनात्मक मजबूती और चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
जेपी नड्डा की अधूरी मुलाकात
इससे कुछ दिन पहले यानी 13 सितंबर को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी बिहार आए थे, लेकिन उनकी मुलाकात नीतीश कुमार से नहीं हो पाई थी। ऐसे में शाह और नीतीश की यह मुलाकात और भी अहम हो गई है। राजनीतिक हलकों में इसे NDA के भीतर तालमेल और एकजुटता का संकेत माना जा रहा है।
कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र
अमित शाह के दौरे का एक और उद्देश्य पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना और उन्हें चुनावी जीत का मंत्र देना है। शाह बेगूसराय और डेहरी में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे और उन्हें आगामी चुनाव की तैयारियों के लिए दिशा-निर्देश देंगे। उनका यह संदेश होगा कि बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना ही जीत की कुंजी है।
पीएम मोदी की सौगातों के बाद शाह का दौरा
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्णिया से बिहार को कई विकास योजनाओं की सौगात दी थी। अब अमित शाह का यह दौरा सीधे चुनावी रणनीति से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। पीएम मोदी और शाह के लगातार दौरे से साफ है कि बीजेपी बिहार चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है और गठबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
सियासी हलचल और कयास
अमित शाह और नीतीश कुमार की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर तेज हो गया है। एक ओर इसे NDA की रणनीतिक मजबूती माना जा रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे महज़ चुनावी दिखावा करार दे रहा है। लेकिन इतना तय है कि इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति को नई ऊर्जा दी है।