बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायिक क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ताओं को महत्वपूर्ण मान्यता प्रदान करते हुए 11 अधिवक्ताओं को सीनियर एडवोकेट के रूप में डेसिग्नेट किया है। हाईकोर्ट की फुल बेंच से स्वीकृति मिलने के पश्चात यह निर्णय औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा के निर्देश पर रजिस्ट्रार जनरल द्वारा 28 अप्रैल 2026 को संबंधित अधिसूचना जारी की गई। यह नियुक्ति एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 16 तथा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट नियम 2025 के अंतर्गत की गई है।
हाईकोर्ट द्वारा जारी सूची में जिन अधिवक्ताओं को सीनियर एडवोकेट का दर्जा प्रदान किया गया है, उनमें शैलेन्द्र दुबे, रणवीर सिंह मरहास, यशवंत ठाकुर, अनूप मजूमदार, नीलाभ दुबे, अमृतो दास, आतीं सिद्दीकी, नौशिना आफरीन अली, अरविन्द श्रीवास्तव तथा तारेंद्र कुमार झा प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन अधिवक्ताओं का न्यायिक क्षेत्र में दीर्घ अनुभव रहा है और उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों में सक्रिय रूप से पक्ष रखा है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सीनियर एडवोकेट का दर्जा न्यायिक प्रणाली में विशिष्ट अनुभव, विधिक ज्ञान एवं पेशेवर योगदान के आधार पर प्रदान किया जाता है। यह सम्मान संबंधित अधिवक्ताओं की विधिक विशेषज्ञता एवं न्यायिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका को औपचारिक मान्यता प्रदान करता है।
कानूनी समुदाय में हाईकोर्ट के इस निर्णय को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं की यह नई भूमिका न्यायिक विमर्श को और अधिक सुदृढ़ करेगी तथा जटिल मामलों में उनकी विशेषज्ञता का लाभ न्यायालय एवं पक्षकारों दोनों को प्राप्त होगा।
इसके अतिरिक्त, इस निर्णय को युवा अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे न्यायिक क्षेत्र में उत्कृष्टता एवं पेशेवर प्रतिबद्धता को बढ़ावा मिलेगा।