छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले महीनों में राहत की उम्मीद कम नजर आ रही है। संकेत मिल रहे हैं कि जून से बिजली दरों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि अभी नई दरें लागू नहीं हुई हैं, लेकिन तैयारियां अंतिम चरण में बताई जा रही हैं।
दरअसल, राज्य की पावर कंपनी ने करीब 6,300 करोड़ रुपये के भारी घाटे का दावा किया है, जिसने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। फरवरी में हुई जनसुनवाई के बाद आयोग लगातार इस बात पर विचार कर रहा है कि घाटे की भरपाई कैसे की जाए और उपभोक्ताओं पर कम से कम बोझ डाला जाए।
वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो कंपनी द्वारा पेश किए गए डेटा में कुछ विरोधाभास भी सामने आए हैं। एक ओर जहां अनुमानित राजस्व 26,216 करोड़ रुपये बताया गया है, वहीं खर्च करीब 25,460 करोड़ रुपये है। इन आंकड़ों के आधार पर कंपनी लाभ में दिखती है, लेकिन पिछले वर्षों के घाटे को जोड़ने के बाद कुल वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया है।
पावर कंपनी का दावा है कि पुराने राजस्व अंतर को मिलाकर उसकी कुल वित्तीय जरूरत 32,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में टैरिफ बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है। अगर आयोग कंपनी के प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो बिजली दरों में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले साल महज 500 करोड़ रुपये के घाटे के आधार पर करीब 2 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इस बार घाटे का आंकड़ा कई गुना ज्यादा होने के कारण फैसला अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है और इसका प्रभाव भी बड़ा हो सकता है।
आमतौर पर नई बिजली दरें अप्रैल से लागू होती हैं, लेकिन इस बार प्रक्रिया में देरी हुई है। आयोग सभी पहलुओं की गहन समीक्षा कर रहा है ताकि उपभोक्ताओं पर असर को संतुलित किया जा सके। माना जा रहा है कि जून तक अंतिम फैसला सामने आ सकता है, जिसके बाद बिजली बिल में बढ़ोतरी का असर दिखने लगेगा।