अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने वैश्विक राजनीति को लेकर एक बार फिर बड़े संकेत दिए हैं, जिनका असर पश्चिम एशिया से लेकर दक्षिण एशिया तक महसूस किया जा सकता है। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच ट्रंप ने युद्ध रोकने की बात कही और संकेत दिया कि यदि समझौता होता है, तो वह हस्ताक्षर के लिए पाकिस्तान तक जा सकते हैं। उनके इस बयान को अमेरिकी विदेश नीति में संभावित बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों पर भी सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने Narendra Modi को अपना ‘दोस्त’ बताते हुए हालिया फोन बातचीत को “बेहद अच्छी” करार दिया। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति, समुद्री सुरक्षा और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित बनाए रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बातचीत को रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान को लेकर ट्रंप के बयान ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ उनके संबंध “बहुत अच्छे” हैं, हालांकि हालिया सैन्य तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच यह बयान एक तरह के यू-टर्न के रूप में भी देखा जा रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अब तक 10 बड़े युद्ध रुकवाए हैं, जिसमें इस्राइल और लेबनान के बीच युद्धविराम भी शामिल है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच “डोनरो डॉक्ट्रिन” की चर्चा तेज हो गई है। यह शब्द ट्रंप की 2026 की विदेश नीति को परिभाषित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति को और अधिक आक्रामक रूप में लागू करने पर जोर है। इसकी ऐतिहासिक जड़ें James Monroe द्वारा 1823 में घोषित मोनरो सिद्धांत में मिलती हैं, जिसके तहत यूरोपीय हस्तक्षेप को अमेरिका के खिलाफ खतरे के रूप में देखा गया था।
ट्रंप ने ईरान की सैन्य स्थिति को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना लगभग समाप्त हो चुकी है और उसके कई जहाज नष्ट हो गए हैं। साथ ही उन्होंने परमाणु हथियारों को लेकर सख्त रुख दोहराते हुए कहा कि अमेरिका का प्राथमिक लक्ष्य ईरान को न्यूक्लियर क्षमता हासिल करने से रोकना है। आने वाले दिनों में संभावित वार्ता और समझौते पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।