Bengal SIR Deadline पर Supreme Court सख्त: एक हफ्ते की राहत

पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम हस्तक्षेप किया है। अदालत ने SIR की समयसीमा को एक सप्ताह के लिए बढ़ाने का आदेश दिया है और साथ ही बंगाल सरकार तथा राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से जवाब मांगा है।

SIR की डेडलाइन बढ़ाने का फैसला

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी, लेकिन इसकी डेडलाइन एक सप्ताह आगे बढ़ाई जा रही है। कोर्ट ने कहा कि SIR में तैनात 8,500 से अधिक अधिकारी सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को रिपोर्ट करेंगे, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजरिया भी शामिल हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान अदालत ने कोर्ट की गरिमा और अनुशासन को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। वरिष्ठ वकीलों के बीच हस्तक्षेप पर CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत कोई बाजार नहीं है और सभी को बारी-बारी से अपनी बात रखनी चाहिए।

बंगाल के DGP से हलफनामा क्यों?

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि SIR से जुड़े नोटिस कुछ स्थानों पर असामाजिक तत्वों द्वारा जलाए गए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के DGP को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और पूछा कि अब तक संबंधित मामलों में FIR क्यों दर्ज नहीं की गई।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया—

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी

राज्य सरकार द्वारा दिए गए 8,505 ग्रुप-B अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर SIR में लगाया जा सकता है

नोटिस जलाने की घटनाओं पर DGP को जवाब देना होगा

FIR दर्ज न होना एक गंभीर चिंता का विषय है

चुनाव आयोग और राज्य सरकार की दलीलें

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि भारत का संविधान सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है।

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका में SIR प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि इससे समाज के कमजोर वर्गों के मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि SIR के दौरान किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए, खासकर वर्तनी या तकनीकी विसंगतियों के आधार पर।

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