छत्तीसगढ़ में तकनीकी शिक्षा और युवाओं के रोजगार से जुड़े औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य में आईटीआई की कुल 32,072 स्वीकृत सीटों में से केवल 23,970 सीटों पर ही नामांकन हो सका है, जबकि 8,102 सीटें अब भी खाली पड़ी हैं। यह स्थिति तकनीकी शिक्षा की जमीनी हकीकत को उजागर करती है।
आंकड़ों के अनुसार, सरकारी संस्थानों की तुलना में निजी आईटीआई में सीटें ज्यादा खाली रहती हैं। यही स्थिति बीते कई वर्षों से देखने को मिल रही है। विद्यार्थियों की कम रुचि वाले ट्रेड को लेकर सरकार ने पहले ही 10 पुराने और अप्रासंगिक ट्रेड बंद कर दिए हैं। इसके साथ ही 15 नए ट्रेड शुरू किए गए हैं और अब 25 और आधुनिक ट्रेड लागू करने की तैयारी की जा रही है।
केंद्र सरकार की पीएम-सेतु योजना के तहत आईटीआई को उद्योगों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अब तक किसी भी राज्य द्वारा उद्योग भागीदारी से जुड़ा ठोस प्रस्ताव राष्ट्रीय संचालन समिति को नहीं भेजा गया है। हालांकि छत्तीसगढ़ में पीपीपी मॉडल के माध्यम से सुधार की कोशिश जारी है। प्रदेश के 42 आईटीआई को इस मॉडल पर उन्नत किया जा चुका है। भिलाई स्टील प्लांट के सहयोग से भिलाई आईटीआई को मॉडल संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है।
आईटीआई पास युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर अप्रेंटिसशिप पर भी जोर दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 से दिसंबर 2025 तक प्रदेश में 21,070 प्रशिक्षुओं को राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत जोड़ा गया है। इनमें 11,557 प्रशिक्षु आईटीआई उत्तीर्ण हैं। योजना के तहत उद्योगों को प्रति प्रशिक्षु प्रतिमाह अधिकतम 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।
तकनीकी शिक्षा को भविष्य की जरूरतों से जोड़ने के लिए सरकार ने ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, सोलर एनर्जी और 5जी नेटवर्क जैसे 31 नए युग के ट्रेड शुरू किए हैं। आगामी सत्र में 25 और नए ट्रेड स्थानीय उद्योगों और बाजार की मांग के अनुसार लागू किए जाएंगे, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन के अनुसार, प्रदेश के आईटीआई को मॉडल संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है और उद्योगों से समन्वय बढ़ाकर विद्यार्थियों को समयानुकूल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।