छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय का 17वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां एवं पदक प्रदान किए। राज्यपाल ने सभी उपाधि एवं पदक प्राप्तकर्ताओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
कला और संस्कृति समाज को दिशा देती है: राज्यपाल
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि कला, संगीत और संस्कृति किसी भी समाज को दिशा देने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और कला का उपयोग राष्ट्र निर्माण और समाज कल्याण के लिए करें।
विश्वविद्यालय का नामकरण और ऐतिहासिक योगदान
राज्यपाल ने घोषणा की कि विश्वविद्यालय को राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाएगा और इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय दानवीर राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती देवी के त्याग और सांस्कृतिक दृष्टि का जीवंत उदाहरण है।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में टंकराम वर्मा और डॉ. अनुज शर्मा उपस्थित रहे।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि किसी भी समाज को सभ्य और सुसंस्कृत बनाने में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
दीक्षांत केवल प्रमाण पत्र नहीं: कुलपति
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल प्रमाण पत्र बांटने की औपचारिकता नहीं, बल्कि यह आत्ममंथन और भविष्य के संकल्प का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया।
ऐतिहासिक बावली का अनावरण
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने राजकुमारी शारदा देवी सिंह बावली की नामपट्टिका का अनावरण किया। यह विश्वविद्यालय परिसर स्थित एक प्राचीन धरोहर है, जिसका संरक्षण किया जा रहा है।