गुरुग्राम की कंपनियों में चार साल से काम कर रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज

ग्रेटर नोएडा से सामने आए एक दर्दनाक हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के चार दिन बाद पुलिस और एनडीआरएफ (NDRF) की संयुक्त कार्रवाई में उनकी कार को पानी से बाहर निकाला जा सका। करीब छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सोनार तकनीक की मदद से यह सफलता मिली।

पढ़ाई से प्रोफेशनल सफर तक

युवराज मूल रूप से ग्रेटर नोएडा के रहने वाले थे। उन्होंने 2022 में गलगोटिया कॉलेज, ग्रेटर नोएडा से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। पढ़ाई के बाद पहली नौकरी मिलने पर वह नवंबर 2024 तक गाजियाबाद में रहे और रोजाना मेट्रो से गुरुग्राम स्थित ऑफिस जाते थे।

ग्रेटर नोएडा शिफ्ट होने के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी के चलते उन्हें अपनी कार से सप्ताह में एक-दो बार ऑफिस जाना पड़ता था, जिससे उनका सफर पहले की तुलना में ज्यादा जोखिम भरा हो गया।

हादसे की रात क्या हुआ

हादसे वाली रात युवराज गुरुग्राम से दो दोस्तों को साथ लेकर नोएडा आए थे। दोस्तों को सुरक्षित छोड़ने के बाद वह अपने घर के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में यह दर्दनाक हादसा हो गया।

दोस्तों के अनुसार, युवराज तेज गाड़ी चलाने वाले नहीं थे और हमेशा सुरक्षा का ध्यान रखते थे।

मेहनती, जिम्मेदार और सपनों से भरा जीवन

युवराज पिछले चार वर्षों से गुरुग्राम की अलग-अलग कंपनियों में कार्यरत थे। करीब दो महीने पहले ही उन्होंने एक नई डेटा स्टोरेज कंपनी जॉइन की थी, जहां उनके काम की काफी सराहना हो रही थी।

परिवार और दोस्तों के अनुसार, युवराज बेहद ईमानदार, जिम्मेदार और अपने काम में माहिर थे। उनकी बहन यूके में रहती हैं और युवराज भी शादी के बाद विदेश में बसने का सपना देखते थे।

6 घंटे की मशक्कत के बाद निकली कार

पुलिस ने एनडीआरएफ की मदद से चार दिन बाद पानी में डूबी कार को बाहर निकाला।

सोनार तकनीक से कार की लोकेशन का पता लगाया गया

शुरुआती प्रयास में इस्तेमाल की गई पुरानी बेल्ट टूट गई

इसके बाद लोहे की चेन की मदद से कार को सुरक्षित बाहर निकाला गया

इस दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन में सामने आई लापरवाही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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