बंगलूरू की केंद्रीय कारागार परप्पना अग्रहारा से देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाली एक गंभीर आतंकी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में खुलासा हुआ कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने जेल के भीतर रहकर बंगलूरू शहर में बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई थी।
जांच के अनुसार, जेल में बंद कुख्यात आतंकी टी. नसीर, जो 2008 के बंगलूरू सीरियल ब्लास्ट केस में आरोपी रहा है, इस साजिश का अहम केंद्र था। योजना के तहत पहले जेल में बंद आतंकियों को छुड़ाने और उसके बाद शहर में आतंकी हमला करने की तैयारी की जा रही थी।
🔸 जेल के भीतर मिलीभगत का जाल
एनआईए ने अपनी पूरक चार्जशीट में जेल के डॉक्टर, एक पुलिस अधिकारी और एक महिला सहयोगी को नामजद किया है। जेल अस्पताल में तैनात मनोचिकित्सक डॉ. नागराज एस पर आरोप है कि उन्होंने अवैध रूप से मोबाइल फोन जेल के भीतर पहुंचाए, जिनमें से एक फोन टी. नसीर तक पहुंचा। इसी फोन के जरिए वह अपने सह-आरोपियों से संपर्क में था।
वहीं, सिटी आर्म्ड रिजर्व-साउथ में तैनात सहायक सब-इंस्पेक्टर चान पाशा ए पर आरोप है कि उन्होंने कैदियों की सुरक्षा ड्यूटी के दौरान रिश्वत लेकर आतंकी नेटवर्क को संवेदनशील जानकारियां उपलब्ध कराईं।
🔸 रसद, हथियार और फरारी की साजिश
चार्जशीट में शामिल अनीस फातिमा, जो फरार आतंकी जुनैद अहमद की मां हैं, पर आतंकियों को धन, रसद और संचार सुविधा देने का आरोप है। जांच में सामने आया कि वह हथगोले और वॉकी-टॉकी संभालने तथा आरोपियों के बीच संपर्क स्थापित करने में भी शामिल थीं। इसके अलावा, उन्होंने मुख्य आरोपी सलमान खान को पनाह देने और उसे दुबई भागने में मदद की थी, जिसे बाद में रवांडा से भारत प्रत्यर्पित किया गया।
एनआईए के मुताबिक, यह पूरी साजिश भारत की संप्रभुता, आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक शांति को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से रची गई थी। एजेंसी ने UAPA, IPC, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और कर्नाटक जेल अधिनियम के तहत आरोप दर्ज किए हैं।