संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल तब गरम हो गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि BJP चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को कमजोर करने की रणनीति चला रही है।
बहस की शुरुआत खादी और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ से करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि “देश 150 करोड़ लोगों से बना है और देश के सभी धागे एक जैसे हैं। लेकिन कुछ शक्तियाँ राष्ट्र के ताने-बाने को नियंत्रित करने और संस्थाओं पर कब्जा जमाने में लगी हैं।”
राहुल गांधी ने कहा कि RSS की विचारधारा सभी संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है, चाहे वे विश्वविद्यालय हों, जांच एजेंसियाँ हों या फिर चुनाव आयोग। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इस दौरान कड़ा विरोध किया, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ने राहुल गांधी को विषय पर केंद्रित रहने की सलाह दी।
चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार चुनाव आयोग को नियंत्रित कर वोट चोरी के माध्यम से लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि CBI और ED जैसी संस्थाओं की तरह चुनाव आयोग पर भी एक ही विचारधारा का प्रभाव बढ़ाया गया है। राहुल गांधी के अनुसार—
🔹 दिसंबर 2023 में सीईसी नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव
🔹 चुनाव आयुक्तों को दंडमुक्त बनाने का प्रावधान
🔹 CCTV फ़ुटेज और डेटा नियंत्रण के नियमों में संशोधन
इन बदलावों से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े होते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा और महाराष्ट्र में वोट चोरी के सबूत मिले हैं, जबकि बिहार में SIR के बाद वोटर लिस्ट में 1,22,000 डुप्लीकेट फ़ोटोज़ पाई गईं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को नियंत्रित करने का उद्देश्य केवल एक है — “चुनाव जीतना नहीं, चुनाव चुराना।”
राहुल गांधी ने मांग की कि
✔ सभी पार्टियों को मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट चुनाव से एक महीने पहले उपलब्ध कराई जाए
✔ CCTV फ़ुटेज हटाने का नियम वापस लिया जाए
✔ वोट चोरी को राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में शामिल किया जाए
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, “भारत एक महान लोकतंत्र है, और लोकतंत्र तभी सुरक्षित है जब चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों। देश चुनाव सुधार चाहता है, लेकिन सरकार इनमें रुचि नहीं ले रही है।”