राज्यपाल श्री रमेन डेका का सक्रिय और जनसंपर्क से भरा एक वर्ष

राज्यपाल श्री रमेन डेका कार्यकाल छत्तीसगढ़ में संवेदनशीलता, सक्रियता और धरातलीय समझ का उदाहरण बन गया है।
अपने पहले वर्ष में उन्होंने केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर हर जिले में जाकर जनसंवाद को प्राथमिकता दी।

उन्होंने सभी 33 जिलों का दौरा कर योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से देखा।
ग्रामीण क्षेत्रों, जनजातीय अंचलों, महिला समूहों और किसानों से संवाद स्थापित कर सरकार की योजनाओं की वास्तविक स्थिति को जाना।

जनकल्याण योजनाओं की जमीनी समीक्षा

राज्यपाल डेका जी ने प्रधानमंत्री आवास योजना, टीबी मुक्त भारत, अमृत सरोवर, और महिला स्व-सहायता समूहों के कार्यों की गहन समीक्षा की।
वे टीबी मरीजों को गोद लेकर आर्थिक और पोषण संबंधी सहायता प्रदान करते हैं और समाज को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं।

जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों को बढ़ावा दिया गया।
राज्य में अमृत सरोवर योजना, वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर सुधार जैसे विषयों को जन आंदोलन में बदला।

शिक्षा और विश्वविद्यालय सुधारों पर फोकस

बतौर कुलाधिपति, उन्होंने 9 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में भाग लिया और विद्यार्थियों को आत्मनिर्भरता की प्रेरणा दी।
उन्होंने 5 शासकीय और 6 निजी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति की और दो बार व्यापक समीक्षा बैठकें आयोजित कीं।

राज्यपाल डेका जी ने शिक्षकों की समय पर पदोन्नति, रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती और शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता पर बल दिया।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बेहतर क्रियान्वयन के लिए औचक निरीक्षण भी किए।

नवाचार, अनुसंधान और संस्कृति संरक्षण

जनजातीय अंचलों में शोध को बढ़ावा देने हेतु पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में अनुसंधान पीठ की स्थापना कराई गई।
उन्होंने तीन गांवों को गोद लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि और संस्कृति पर केंद्रित विकास की दिशा में पहल की।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन कर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नियुक्ति प्रक्रिया सुचारू की।
रेडक्रॉस सोसायटी को पारदर्शी संस्था बनाने के लिए उन्होंने चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ करवाई।

सामाजिक समरसता की दिशा में योगदान

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान को राजभवन स्तर पर पूरे उत्साह के साथ मनाया गया।
भाईचारे, एकता और विविधता के संदेश को प्रसारित कर उन्होंने देश की सामाजिक भावना को मजबूती दी।

उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को 5-5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी।
स्वेच्छानुदान मद से 584 संस्थाओं को 1.22 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई।

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