बायकॉट इंडिया से वेलकम मोदी तक, बदले मालदीव के सुर

मालदीव में भारत प्रभाव एक बार फिर स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। जहां कभी “इंडिया आउट” के नारे गूंजते थे, वहीं अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में मालदीव सरकार ने पलक पांवड़े बिछा दिए।

वर्ष 2023 में हुए मालदीव के चुनावों में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत विरोध को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया था। उन्होंने भारतीय सैनिकों की उपस्थिति और भारतीय कंपनियों की भूमिका पर आपत्ति जताई थी। “बायकॉट इंडिया” का ट्रेंड भारत में तेजी से फैला और भारतीय पर्यटकों ने मालदीव जाना बंद कर दिया।

इसका असर मालदीव की अर्थव्यवस्था पर सीधा पड़ा। पर्यटन से चलने वाले इस देश को भारी घाटा हुआ। विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 440 मिलियन डॉलर पर सिमट गया। संकट की इस घड़ी में भारत ने ही मदद का हाथ बढ़ाया और मुइज्जू सरकार को आर्थिक राहत दी।

मालदीव में भारत प्रभाव फिर तब उजागर हुआ, जब 25 जुलाई को पीएम मोदी माले पहुंचे। इस दौरे पर मालदीव सरकार ने पारंपरिक रुख छोड़कर भारत के साथ गर्मजोशी से संबंध बहाल करने के संकेत दिए। यह वही मालदीव है जहां एक समय भारतीय सैनिकों की उपस्थिति पर आपत्ति जताई गई थी।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत अब भी मालदीव में नियमित रूप से दो हेलीकॉप्टर और एक सैन्य विमान का संचालन कर रहा है, जो भारत द्वारा उपहार में दिए गए थे। यही सैन्य मौजूदगी मुइज्जू के विरोध का विषय थी, लेकिन अब वही भारत फिर से मालदीव में रणनीतिक और आर्थिक रूप से मजबूती से उपस्थित है।

इन घटनाओं ने दिखा दिया कि भारत को नजरअंदाज करने की नीति अब काम नहीं करती। मोहम्मद मुइज्जू और उनके समर्थक अब यह मानने लगे हैं कि भारत के बिना मालदीव की सुरक्षा, पर्यटन और अर्थव्यवस्था अधूरी है।

आज जब माले की सड़कों पर “वेलकम मोदी” के पोस्टर लगे हैं, तब यह स्पष्ट हो चुका है कि मालदीव में भारत प्रभाव अब न केवल लौटा है, बल्कि पहले से भी अधिक मज़बूत होकर उभरा है।

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