माँ दंतेश्वरी अस्पताल पर अवैध संचालन का पर्दाफाश

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के दलपत सागर वार्ड में स्थित “माँ दंतेश्वरी ट्रामा एंड क्रिटिकल केयर अस्पताल” पिछले दो वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से संचालित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग को मिली शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बाद भी इस अस्पताल पर केवल ₹20,000 का जुर्माना लगाकर मामला दबा दिया गया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह अस्पताल अब भी मृत व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है। अस्पताल प्रबंधन ने न तो नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस नवीनीकरण कराया है और न ही संचालक की मृत्यु की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी। फिर भी, विभागीय कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाख ने पुष्टि की कि अस्पताल में निरीक्षण के दौरान कई खामियां मिलीं। टीम ने पाया कि न तो वैध संचालक मौजूद हैं, न ही उपकरणों की स्थिति वैधानिक मापदंडों पर खरी उतरती है। बावजूद इसके, अस्पताल सील नहीं किया गया, बल्कि जुर्माने के साथ एक हलफनामा भरवाकर छोड़ दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठते हैं, खासकर तब जब ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप चिकित्सकों के क्लीनिक को बिना विलंब के सील कर दिया जाता है। आरोप यह भी है कि इस अस्पताल को दो सरकारी डॉक्टर—डॉ. लखन ठाकुर और डॉ. वीरेंद्र ध्रुव के सहयोग से गुपचुप तरीके से संचालित किया जा रहा है। उनके परिजनों को बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन की पावर ऑफ अटॉर्नी भी दी गई है, जिसकी जानकारी विभाग को नहीं दी गई।

शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि 2022 में जिन मशीनों के नाम पर अस्पताल को लाइसेंस मिला था, वे आज अस्पताल में मौजूद ही नहीं हैं। इसके बावजूद मरीजों से ऑपरेशन और इलाज के नाम पर भारी रकम वसूली जा रही है।

जांच टीम ने मरीजों से कोई संवाद नहीं किया और न ही चिकित्सा उपकरणों की समुचित जांच की। यह स्पष्ट करता है कि पूरी जांच सिर्फ दिखावा थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन पर ऐसे संस्थानों को तुरंत सील कर देना चाहिए। लेकिन प्रशासनिक ढिलाई और राजनीतिक संरक्षण की वजह से अस्पताल अब भी खुला है और मृत संचालक के नाम पर चल रहा है।

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