एक समय था जब नारायणपुर जिले के अबुझमाड़ क्षेत्र के ईरकभट्टी गांव का स्कूल वीरान पड़ा था। कमरे धूल और सन्नाटे से भरे रहते थे। दरवाजों पर ताले लटकते थे, और बच्चे किताबों की जगह घरों के कामों में लग जाते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अब वही स्कूल बच्चों की चहचहाहट से गूंज रहा है।
इस बदलाव का श्रेय छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नियद नेल्ला नार’ योजना और ‘युक्तियुक्तकरण’ नीति को जाता है। ‘नियद नेल्ला नार’ का मतलब होता है – आपका अच्छा गांव। इस योजना के जरिए राज्य सरकार माओवाद प्रभावित गांवों में जरूरी सुविधाएं पहुंचा रही है, ताकि वहां का जीवन बेहतर हो सके।
माओवाद के डर से बंद था स्कूल
ईरकभट्टी गांव में पहले माओवाद के डर से स्कूल बंद हो गया था। लेकिन अब वहां सड़क बन गई है, बिजली पहुंच गई है और स्कूल फिर से खुल चुका है।
ईरकभट्टी की यह कहानी अकेले एक गांव की नहीं है। यह उन हजारों गांवों की है जो कभी उपेक्षा और डर के अंधेरे में थे। लेकिन आज ‘नियद नेल्ला नार’ और ‘युक्तियुक्तकरण’ जैसी योजनाएं वहां रोशनी लेकर आई हैं।
अब ये गांव सिर्फ सुरक्षा नहीं, शिक्षा और समृद्धि की ओर भी बढ़ रहे हैं। शिक्षा की लौ एक बार फिर जल चुकी है, और इस बार यह लौ बुझने वाली नहीं है।