सुकमा जिले की आवासीय शालाओं में प्रबंधन की लापरवाही से बच्चों की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा घटना छिंदगढ़ ब्लॉक के बालाटिकरा स्थित कन्या आवासीय पोटाकेबिन विद्यालय की है।
सुकमा कन्या पोटाकेबिन मौत- यहां दूसरी कक्षा की 8 वर्षीय छात्रा रौशनी नाग की अज्ञात बीमारी से मौत हो गई।
सोमवार सुबह प्रार्थना के बाद छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। स्कूल स्टाफ उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहा था, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही छात्रा की मौत हो गई।
डॉक्टरों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। घटना की जानकारी मिलते ही डीएमसी उमाशंकर तिवारी अस्पताल पहुंचे।
बिना इलाज अब तक तीन मौतें
जानकारी के अनुसार, जिले के अन्य पोटाकेबिन और आवासीय आश्रमों में इलाज के अभाव में अब तक तीन आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है।
रौशनी नाग की मां रामबती को सुबह 6 बजे स्टाफ से बेटी की तबीयत खराब होने की सूचना मिली। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें बेटी की मौत का पता चला।
रामबती ने बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और दिवाली की छुट्टियों में घर पर भी आई थी। उन्होंने पोटाकेबिन प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा, “बिना बीमारी के अचानक मौत कैसे हो सकती है? मेरी बेटी को इलाज क्यों नहीं मिला?”
प्रशासन पर सवालिया निशान
इस घटना ने पोटाकेबिन विद्यालयों के प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर भी चर्चा शुरू हो गई है।